Tuesday, December 6, 2022

अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता और परिजनों के स्वास्थ्य जांच को लेकर हाईकोर्ट में याचिका

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रदेश के सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता देने, उनके परिवार के संपूर्ण स्वास्थ्य जांच, और अधिवक्ताओं को मिलने वाली सभी नियमों में उल्लिखित समस्त सुविधाओं को दिए जाने के लिए अधिवक्ता आनंद मोहन तिवारी ने याचिका दायर की है। 

याचिका में कहा गया है, कि स्टेट बार काउंसिल छत्तीसगढ़ नियम 2005 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया सहित अन्य सभी अधिवक्ता कल्याण के जितने प्रावधान हैं। सभी प्रावधानों के तहत इस कोरोना संकट के समय में लाभ अधिवक्ताओं को दिया जाना चाहिए। पिटीशन में हाईकोर्ट अधिवक्ता आनंद मोहन तिवारी ने सभी पक्षों का उल्लेख करते हुए याचिका में लिखा है, कि प्रदेश के दूरस्थ अंचल में भी अधिवक्ता विधि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, और कोरोना महामारी में लॉक डाउन के कारण विधि व्यवसाय प्रभावित है, और न्यायालीन प्रक्रिया पूरी तरीके से रुकी हुई है, जिसके कारण अधिवक्ताओं को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। खासकर ऐसे अधिवक्ता जो कि मुख्य रूप से विधि व्यवसाय पर ही आश्रित हैं। जिनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है, उनके लिए यह संकट का समय हैं, ऐसे में स्टेट बार काउंसिल छत्तीसगढ़, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, अधिवक्ता कल्याण अधिनियम, सहित अनेक प्रावधानों का हमने उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। ताकि सभी को एक निश्चित राशि सहायता के रूप में प्रदान की जाए। साथ ही अधिवक्ताओं एवं उनके परिवार का पूर्ण रूप से स्वास्थ्य की जांच की भी जानी चाहिए, ताकि यह स्थिति से निपटने के बाद बिना व्यवधान के न्यायालय कार्य जारी रखा जा सके। उन्होंने अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए एक कल्याण कोष की स्थापना किए जाने का भी निवेदन याचिका में किया है। इस कोष में अन्य संस्थाओं व अधिवक्ताओं द्वारा सहयोग प्राप्त होता रहे। जैसे कि जरूरतमंद अधिवक्ताओं व अन्य अधिवक्ताओं को इसका निरंतर लाभ मिलता रहे। 

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बिलासपुर– छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रदेश के सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता देने, उनके परिवार के संपूर्ण स्वास्थ्य जांच, और अधिवक्ताओं को मिलने वाली सभी नियमों में उल्लिखित समस्त सुविधाओं को दिए जाने के लिए अधिवक्ता आनंद मोहन तिवारी ने याचिका दायर की है। 

याचिका में कहा गया है, कि स्टेट बार काउंसिल छत्तीसगढ़ नियम 2005 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया सहित अन्य सभी अधिवक्ता कल्याण के जितने प्रावधान हैं। सभी प्रावधानों के तहत इस कोरोना संकट के समय में लाभ अधिवक्ताओं को दिया जाना चाहिए। पिटीशन में हाईकोर्ट अधिवक्ता आनंद मोहन तिवारी ने सभी पक्षों का उल्लेख करते हुए याचिका में लिखा है, कि प्रदेश के दूरस्थ अंचल में भी अधिवक्ता विधि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, और कोरोना महामारी में लॉक डाउन के कारण विधि व्यवसाय प्रभावित है, और न्यायालीन प्रक्रिया पूरी तरीके से रुकी हुई है, जिसके कारण अधिवक्ताओं को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। खासकर ऐसे अधिवक्ता जो कि मुख्य रूप से विधि व्यवसाय पर ही आश्रित हैं। जिनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है, उनके लिए यह संकट का समय हैं, ऐसे में स्टेट बार काउंसिल छत्तीसगढ़, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, अधिवक्ता कल्याण अधिनियम, सहित अनेक प्रावधानों का हमने उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। ताकि सभी को एक निश्चित राशि सहायता के रूप में प्रदान की जाए। साथ ही अधिवक्ताओं एवं उनके परिवार का पूर्ण रूप से स्वास्थ्य की जांच की भी जानी चाहिए, ताकि यह स्थिति से निपटने के बाद बिना व्यवधान के न्यायालय कार्य जारी रखा जा सके। उन्होंने अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए एक कल्याण कोष की स्थापना किए जाने का भी निवेदन याचिका में किया है। इस कोष में अन्य संस्थाओं व अधिवक्ताओं द्वारा सहयोग प्राप्त होता रहे। जैसे कि जरूरतमंद अधिवक्ताओं व अन्य अधिवक्ताओं को इसका निरंतर लाभ मिलता रहे।