Monday, November 28, 2022

एकलव्य आवासीय स्कूल के अधीक्षिका की मनमानी, स्टूडेंट्स परेशान

पेण्ड्रा– एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पेण्ड्रा जिसका संचालन सत्र 2019-20 से फिजिकल कॉलेज पेण्ड्रा में संचालित हो रहा है जहां पहले वर्ष से ही 30 बालक एवं 30 बालिकाएं है जहाँ कुल छात्र छात्राएं 60 है . जहाँ बिलासपुर जिले से चयनित छात्र छात्राएं अध्ययनरत है वही इस आवासीय विद्यालय में वनांचल क्षेत्र जैसे टेंगनमाडा , बिल्हा , बस्तिबगरा , सिवनी मरवाही के छात्र रहते है . वही विद्यालय में पढ़ने वाले सभी छात्र छात्राएं आदिवासी वर्ग के है .
चूंकि यह आवासीय विद्यालय है इसलिए बच्चो के लिए आवास की व्यवस्था भी संचालित है .
वही देखा यह जाता है कि बालक एवं बालिका छात्रवास में अधीक्षक और अधीक्षिका लगातार अपने कार्य मे लापरवाही बरतने की शिकायत सामने आते रहती है . वही न तो बालक छात्रावास के अधीक्षक छात्रावास में रहते है ना ही बालिका छत्रावस की अधीक्षिका रहती है . बच्चो ने बताया कि अधीक्षक और अधीक्षिका 4 या पांच दिन के अंतर में आते है आकर खाना पूर्ति कर चल देते है . वही बालिका छत्रावस की अधिक्षिका फोन से ही छत्रावस का संचालन करती है . चूंकि अधिक्षिका बिलासपुर से पेण्ड्रा आती है .

स्थिति तब ज्यादा भयावह हो जाती है जब बच्चो की तबियत खराब होती है जब बच्चे दर्द में तड़पते रहते है और जब तक बच्चो के अभिवावक नही आ जाते तब तक बच्चो को उपचार नही मिल जाता क्योकि अधीक्षक और अधिक्षिका छत्रावस में रहते ही नही है .वही अन्य सुविधाओं की बात की जाए तो भी बच्चो को सुविधाएं नही मिल पाती है .

जबकि एकलव्य विद्यालय संचालन की पूरी जवाबदेही जिलाधीश की होती है वही जिला मुख्यालय से दूरी होने की वजह से जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आते है और शासन से मोटी रकम तो लेते है मगर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नही करते है .
वही जब इस मामले में ट्राईवल विभाग के अधिकारी से बात की गई तो उनके द्वारा तत्काल प्रभाव से मंडल संयोजक को जांच के लिए भेजा जांच में भी अधीक्षक और अधिक्षिका मौके पर नही मिले जिससे यह परिलाक्षित होता है कि जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदरी का निर्वाहन नही कर रहे है और न ही इन्हें उच्चाधिकारियों का डर है तब तो यह मनमाने तरीके से अपने ड्यूटी निभा रहे है

GiONews Team
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पेण्ड्रा– एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पेण्ड्रा जिसका संचालन सत्र 2019-20 से फिजिकल कॉलेज पेण्ड्रा में संचालित हो रहा है जहां पहले वर्ष से ही 30 बालक एवं 30 बालिकाएं है जहाँ कुल छात्र छात्राएं 60 है . जहाँ बिलासपुर जिले से चयनित छात्र छात्राएं अध्ययनरत है वही इस आवासीय विद्यालय में वनांचल क्षेत्र जैसे टेंगनमाडा , बिल्हा , बस्तिबगरा , सिवनी मरवाही के छात्र रहते है . वही विद्यालय में पढ़ने वाले सभी छात्र छात्राएं आदिवासी वर्ग के है .
चूंकि यह आवासीय विद्यालय है इसलिए बच्चो के लिए आवास की व्यवस्था भी संचालित है .
वही देखा यह जाता है कि बालक एवं बालिका छात्रवास में अधीक्षक और अधीक्षिका लगातार अपने कार्य मे लापरवाही बरतने की शिकायत सामने आते रहती है . वही न तो बालक छात्रावास के अधीक्षक छात्रावास में रहते है ना ही बालिका छत्रावस की अधीक्षिका रहती है . बच्चो ने बताया कि अधीक्षक और अधीक्षिका 4 या पांच दिन के अंतर में आते है आकर खाना पूर्ति कर चल देते है . वही बालिका छत्रावस की अधिक्षिका फोन से ही छत्रावस का संचालन करती है . चूंकि अधिक्षिका बिलासपुर से पेण्ड्रा आती है .

स्थिति तब ज्यादा भयावह हो जाती है जब बच्चो की तबियत खराब होती है जब बच्चे दर्द में तड़पते रहते है और जब तक बच्चो के अभिवावक नही आ जाते तब तक बच्चो को उपचार नही मिल जाता क्योकि अधीक्षक और अधिक्षिका छत्रावस में रहते ही नही है .वही अन्य सुविधाओं की बात की जाए तो भी बच्चो को सुविधाएं नही मिल पाती है .

जबकि एकलव्य विद्यालय संचालन की पूरी जवाबदेही जिलाधीश की होती है वही जिला मुख्यालय से दूरी होने की वजह से जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आते है और शासन से मोटी रकम तो लेते है मगर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नही करते है .
वही जब इस मामले में ट्राईवल विभाग के अधिकारी से बात की गई तो उनके द्वारा तत्काल प्रभाव से मंडल संयोजक को जांच के लिए भेजा जांच में भी अधीक्षक और अधिक्षिका मौके पर नही मिले जिससे यह परिलाक्षित होता है कि जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदरी का निर्वाहन नही कर रहे है और न ही इन्हें उच्चाधिकारियों का डर है तब तो यह मनमाने तरीके से अपने ड्यूटी निभा रहे है