Monday, November 28, 2022

जनप्रतिनिधि की दरियादिली, नवजात बछड़े के मुंह में फूंककर लौटाई सांसें

तखतपुर (टेकचंद कारड़ा)- दुर्घटना या ऐसे वक्त में जब किसी की धड़कनें रुक रही हो, तब उसे मुंह से सांस देकर उसकी धड़कनों को बढ़ाने की कोशिश आप अक्सर इंसानों में देख सकते हैं, पर तखतपुर के एक गौसेवक ने मरणासन्न बछड़े के मुंह में सांस देकर उसे जीवित कर दिया, अब लोग उस गौरक्षक की तारीफ करते नही थक रहे।

अक्सर देखा जाता है, जब किसी की धड़कने रुक जाती है, तब चिकित्सक सलाह देते हैं, कि सांस थम चुके व्यक्ति के हृदय पर पंप करना चाहिए, और मुंह से उसे सांस देनी चाहिए,।और अक्सर ऐसा होता है, कि जिस व्यक्ति की सांसें रुक गई हैं, वह इन प्रयासों से वापस जी उठता है, पर यह सब कुछ अब तक इंसानों के लिए सुना था, पर यह कार्य गौ रक्षक जन्म लिए बछड़े जिसकी सांसे थम चुकी थी उसे मुंह से सांस लेकर उसे भी बचा लेंगे यह सब देखने वालों को उस समय आश्चर्य लग रहा था।

पर तखतपुर विकासखंड से नवनिर्वाचित जनपद सदस्य सहोदरा यादव के बेटे अजय यादव और पार्षद कोमल ठाकुर ने ऐसे ही एक गाय को सार्वजनिक स्थल पर जन्म देने की सूचना मिली, तब गाय आसानी से प्रसव हो सके पहले तो उन्होंने इसके लिए काफी प्रयास किए पर जब बछड़ा जन्म ले रहा था। तब लग रहा था, कि वह अपनी मां के पेट में अपनी सांसे खो चुका था। यादव परिवार में जन्मे जनपद सदस्य अजय यादव को गाय से प्रसव कराने का बुजुर्गों से अनुभव मिला हुआ था। गाय से प्रसव काफी मुश्किल से कराया पर देखा कि जो बछड़ा जन्म ले रहा है उसकी सांसें थम चुकी है पर वह हिम्मत नहीं हारा, और अपने साथियों के साथ पहले बछड़े को जन्म दिलाया और देखा कि बछड़े में कुछ सांसे बाकी है इसे देखते हुए उसने बछड़े को मुंह से मुंह लगाकर सांसें भर दी और बछड़ा जीवित हो उठा, इसके बाद गाय भी अपने जीवित बछड़े को उठकर पुचकारने लगी, और जिसे देखकर वहां आसपास के खड़े लोगों में काफी खुश हुए। नगर के गौ रक्षकों के सराहना सोशल मीडिया में काफी हो रही।

गौ सेवक पार्षद कोमल सिंह ठाकुर ने बताया, कि पूर्व में भी कई बार सार्वजनिक स्थानों पर जब गाय जन्म देती है, तो इसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, और पहले भी एक बछड़ा जो जन्म के समय लग रहा था, कि उसकी सांसें थम चुकी है उसके मुंह में भी ऑक्सीजन देकर बछड़े में जान बचा दी गई थी।

GiONews Team
Editor In Chief

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

4,364FansLike
5,464FollowersFollow
3,245SubscribersSubscribe

Latest Articles

तखतपुर (टेकचंद कारड़ा)- दुर्घटना या ऐसे वक्त में जब किसी की धड़कनें रुक रही हो, तब उसे मुंह से सांस देकर उसकी धड़कनों को बढ़ाने की कोशिश आप अक्सर इंसानों में देख सकते हैं, पर तखतपुर के एक गौसेवक ने मरणासन्न बछड़े के मुंह में सांस देकर उसे जीवित कर दिया, अब लोग उस गौरक्षक की तारीफ करते नही थक रहे।

अक्सर देखा जाता है, जब किसी की धड़कने रुक जाती है, तब चिकित्सक सलाह देते हैं, कि सांस थम चुके व्यक्ति के हृदय पर पंप करना चाहिए, और मुंह से उसे सांस देनी चाहिए,।और अक्सर ऐसा होता है, कि जिस व्यक्ति की सांसें रुक गई हैं, वह इन प्रयासों से वापस जी उठता है, पर यह सब कुछ अब तक इंसानों के लिए सुना था, पर यह कार्य गौ रक्षक जन्म लिए बछड़े जिसकी सांसे थम चुकी थी उसे मुंह से सांस लेकर उसे भी बचा लेंगे यह सब देखने वालों को उस समय आश्चर्य लग रहा था।

पर तखतपुर विकासखंड से नवनिर्वाचित जनपद सदस्य सहोदरा यादव के बेटे अजय यादव और पार्षद कोमल ठाकुर ने ऐसे ही एक गाय को सार्वजनिक स्थल पर जन्म देने की सूचना मिली, तब गाय आसानी से प्रसव हो सके पहले तो उन्होंने इसके लिए काफी प्रयास किए पर जब बछड़ा जन्म ले रहा था। तब लग रहा था, कि वह अपनी मां के पेट में अपनी सांसे खो चुका था। यादव परिवार में जन्मे जनपद सदस्य अजय यादव को गाय से प्रसव कराने का बुजुर्गों से अनुभव मिला हुआ था। गाय से प्रसव काफी मुश्किल से कराया पर देखा कि जो बछड़ा जन्म ले रहा है उसकी सांसें थम चुकी है पर वह हिम्मत नहीं हारा, और अपने साथियों के साथ पहले बछड़े को जन्म दिलाया और देखा कि बछड़े में कुछ सांसे बाकी है इसे देखते हुए उसने बछड़े को मुंह से मुंह लगाकर सांसें भर दी और बछड़ा जीवित हो उठा, इसके बाद गाय भी अपने जीवित बछड़े को उठकर पुचकारने लगी, और जिसे देखकर वहां आसपास के खड़े लोगों में काफी खुश हुए। नगर के गौ रक्षकों के सराहना सोशल मीडिया में काफी हो रही।

गौ सेवक पार्षद कोमल सिंह ठाकुर ने बताया, कि पूर्व में भी कई बार सार्वजनिक स्थानों पर जब गाय जन्म देती है, तो इसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, और पहले भी एक बछड़ा जो जन्म के समय लग रहा था, कि उसकी सांसें थम चुकी है उसके मुंह में भी ऑक्सीजन देकर बछड़े में जान बचा दी गई थी।