Saturday, December 3, 2022

जैव विविधता महोत्सव का हुआ शुभारंभ, 22 मई को होगा समापन

बिलासपुर– फुलवारी शिक्षण एवं युवा कल्याण समिति, स्प्राउट , यूथफूल इंडिया व युथ संस्कार फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में जैव विविधता महोत्सव का आज शुभारम्भ हुआ जो 22 मई तक चलेगा।

आयोजन के आज प्रथम दिवस में स्प्राउट्स के संस्थापक आनंद पेंढारकर ने ‘जैव विविधता भारत को महाशक्ति बनायेगा’ विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि, 20000 लाख वर्ष पूर्व से सभी जीव जंतु पृथ्वी में रह रहे हैं. इस पृथ्वी में उनका भी उतना ही हक है जितना इंसानों का है. लेकिन विकास कि अवधारणा सिर्फ मनुष्यों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।जिस जगह जितने ज्यादा पेड़ पौधे होते है उस जगह उतने ज्यादा जैव विविधता होती है ,जिसके कारण वहाँ का वातावरण शांत एवं मन को मोहित करने वाला होता है। जैवविविधता के ईको सिस्टम को बनाए रखने के साथ-साथ अनेकानेक लाभ है ,जो ब्लड बैंकों की स्थापना है वो भी जंतु से लिया गया है ।
सदाबाहर पौधे जो हमारे घर व आस पास पाए जाते है इसका उपयोग ब्लड कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है वही टेक्सस नामक पौधे जो हिमालय, उत्तराखंड में पाया जाता है, जिसका उपयोग भी कैंसर के उपचार के लिए किया जाता है। चमगादड़, मच्छर व किट खाते है. अगर कोरोना के डर से हम इन्हें मारते है तो 1 लाख लोगों की मौत मलेरिया व डेंगू से हो सकती है।


विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या जैव विविधता पे निर्भर रहती है। वही हमारे देश के 80 प्रतिशत गरीब लोगों का आर्थिक स्त्रोत जैव विविधता ही है।
अंजीर जैसे कई ऐसे फल होते है जो जानवरों के पेट से होकर गुजरने के बाद ही अंकुरित होते है।
भारत सरकार विगत 15 वर्षों से जैव विविधता के रिकॉर्ड रखना शुरू की है, इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं है छत्तीसगढ़ में बहुत सारे अमूल्य पेड़ पौधे व जीव जंतु पाए जाते है, जिसमे रिसर्च कर बहुत सारे अविष्कार किया जा सकता है।

जैव विविधता का सबसे ज्यादा उपयोग बाग-बगीचों की सजावट के रूप में किया जाता है ।
कौआ बहुत ही सहनशील जीव होता है अगर वह ज्यादा तागत में मृत देखा गया तो इसका सीधा मतलब यह है कि उस क्षेत्र में बड़ी विपदा आने वाली है।

इस कार्यक्रम में देश विदेश से 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का संचालन अजिता पाण्डेय ने किया एवं सफल बनाने नितेश साहू, अभय दुबे, महेश सामंत,शिवम मिश्रा इत्यादि ने योगदान दिया।

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Editor In Chief

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बिलासपुर– फुलवारी शिक्षण एवं युवा कल्याण समिति, स्प्राउट , यूथफूल इंडिया व युथ संस्कार फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में जैव विविधता महोत्सव का आज शुभारम्भ हुआ जो 22 मई तक चलेगा।

आयोजन के आज प्रथम दिवस में स्प्राउट्स के संस्थापक आनंद पेंढारकर ने ‘जैव विविधता भारत को महाशक्ति बनायेगा’ विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि, 20000 लाख वर्ष पूर्व से सभी जीव जंतु पृथ्वी में रह रहे हैं. इस पृथ्वी में उनका भी उतना ही हक है जितना इंसानों का है. लेकिन विकास कि अवधारणा सिर्फ मनुष्यों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।जिस जगह जितने ज्यादा पेड़ पौधे होते है उस जगह उतने ज्यादा जैव विविधता होती है ,जिसके कारण वहाँ का वातावरण शांत एवं मन को मोहित करने वाला होता है। जैवविविधता के ईको सिस्टम को बनाए रखने के साथ-साथ अनेकानेक लाभ है ,जो ब्लड बैंकों की स्थापना है वो भी जंतु से लिया गया है ।
सदाबाहर पौधे जो हमारे घर व आस पास पाए जाते है इसका उपयोग ब्लड कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है वही टेक्सस नामक पौधे जो हिमालय, उत्तराखंड में पाया जाता है, जिसका उपयोग भी कैंसर के उपचार के लिए किया जाता है। चमगादड़, मच्छर व किट खाते है. अगर कोरोना के डर से हम इन्हें मारते है तो 1 लाख लोगों की मौत मलेरिया व डेंगू से हो सकती है।


विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या जैव विविधता पे निर्भर रहती है। वही हमारे देश के 80 प्रतिशत गरीब लोगों का आर्थिक स्त्रोत जैव विविधता ही है।
अंजीर जैसे कई ऐसे फल होते है जो जानवरों के पेट से होकर गुजरने के बाद ही अंकुरित होते है।
भारत सरकार विगत 15 वर्षों से जैव विविधता के रिकॉर्ड रखना शुरू की है, इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं है छत्तीसगढ़ में बहुत सारे अमूल्य पेड़ पौधे व जीव जंतु पाए जाते है, जिसमे रिसर्च कर बहुत सारे अविष्कार किया जा सकता है।

जैव विविधता का सबसे ज्यादा उपयोग बाग-बगीचों की सजावट के रूप में किया जाता है ।
कौआ बहुत ही सहनशील जीव होता है अगर वह ज्यादा तागत में मृत देखा गया तो इसका सीधा मतलब यह है कि उस क्षेत्र में बड़ी विपदा आने वाली है।

इस कार्यक्रम में देश विदेश से 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का संचालन अजिता पाण्डेय ने किया एवं सफल बनाने नितेश साहू, अभय दुबे, महेश सामंत,शिवम मिश्रा इत्यादि ने योगदान दिया।