Tuesday, August 16, 2022

ठंड से दो व्यक्ति की मौत, दोनों की नहीं हो सकी पहचान, समाजसेवियों ने किया लावारिस शवों का अंतिम संस्कार

पेंड्रा– गौरेला के सेमरा और पतरकोनी गांव में बीते सोमवार को दो लोगों की ठंड से मौत हो गई, जिनकी 24 घंटे के बाद भी शिनाख्त नहीं हुई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तक इन दोनों ही शवों की जब शिनाख्त नहीं हो सकी, तो इनके अंतिम संस्कार का बीड़ा स्थानीय समाजसेवियों ने उठाया, और विधिवत तरीके से अंतिम संस्कार कराया गया।
दरअसल सोमवार को गौरेला के सेमरा और पतरकोनी में दो लोगों की मौत ठंड से अकड़ कर हो गई थी, पुलिस ने दोनों शवों की शिनाख्त की काफी प्रयास किए, पर कुछ पता नहीं चल पाया ऐसे में जब भी इन मृत लोगों के लावारिस होने की जानकारी स्थानीय समाजसेवियों को हुई उन्होंने इन शवों का हमेशा की तरह सम्मान अंतिम संस्कार कराने की उत्कृष्ट समाज सेवा का मिसाल पेश की।
लोगों को जब जानकारी हुई की एक साथ दो शव पेंड्रा के पोस्टमार्टम हाउस में आए हुए हैं, तो लोगों ने इनके अंतिम संस्कार के लिए पायल की और इन दोनों ही शवों का इंदिरा उद्यान के पास स्थित लावारिस शवों के लिए बनाए गए मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया, और दोनों मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस कार्य में राकेश जालान, शरद अग्रवाल, मनीष सातूवाला, गणेश जायसवाल, आनंद गोयंका, राकेश मिश्रा, मनीष श्रीवास सहित अन्य लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
GiONews Team
Editor In Chief

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पेंड्रा– गौरेला के सेमरा और पतरकोनी गांव में बीते सोमवार को दो लोगों की ठंड से मौत हो गई, जिनकी 24 घंटे के बाद भी शिनाख्त नहीं हुई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तक इन दोनों ही शवों की जब शिनाख्त नहीं हो सकी, तो इनके अंतिम संस्कार का बीड़ा स्थानीय समाजसेवियों ने उठाया, और विधिवत तरीके से अंतिम संस्कार कराया गया।
दरअसल सोमवार को गौरेला के सेमरा और पतरकोनी में दो लोगों की मौत ठंड से अकड़ कर हो गई थी, पुलिस ने दोनों शवों की शिनाख्त की काफी प्रयास किए, पर कुछ पता नहीं चल पाया ऐसे में जब भी इन मृत लोगों के लावारिस होने की जानकारी स्थानीय समाजसेवियों को हुई उन्होंने इन शवों का हमेशा की तरह सम्मान अंतिम संस्कार कराने की उत्कृष्ट समाज सेवा का मिसाल पेश की।
लोगों को जब जानकारी हुई की एक साथ दो शव पेंड्रा के पोस्टमार्टम हाउस में आए हुए हैं, तो लोगों ने इनके अंतिम संस्कार के लिए पायल की और इन दोनों ही शवों का इंदिरा उद्यान के पास स्थित लावारिस शवों के लिए बनाए गए मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया, और दोनों मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस कार्य में राकेश जालान, शरद अग्रवाल, मनीष सातूवाला, गणेश जायसवाल, आनंद गोयंका, राकेश मिश्रा, मनीष श्रीवास सहित अन्य लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।