Tuesday, August 16, 2022

महंगाई भत्ते पर कटौती, केन्द्र सरकार का नौकरीपेशा वर्ग को आर्थिक आघात, लिपिक संघ ने किया विरोध

बिलासपुर– केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियो के महंगाई भत्ते पर जुलाई 2021तक कटौती करने के निर्णय का छग प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने विरोध किया है, संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने बयान जारी कर कहा, कि एक तरफ कोरोना का कहर देश भर मे फैला हुआ है लोग लाक डाउन मे घरो मे कैद है ऐसी विपरीत परिस्थति मे कर्मचारी वर्ग अपना दायित्व जान जोखिम मे लगाकर निर्वहन कर रहे है स्वास्थ विभाग, सहित अन्य विभाग के कर्मचारी कार्यालयों मे जाकर शासन का कार्य पूरी निष्ठा से कर रहे है ऐसी परिस्थति मे जहां कर्मचारियो को प्रोत्साहन की आवश्यकता है वहां महंगाई भत्ते पर जुलाई 2021तक कटौती का निर्णय केन्द्र सरकार का देश के नौकरी पेशा वर्ग एवं पेंशनरों पर आर्थिक आघात है।

आजादी के बाद 1962 चाइना युद्ध, 1965 एवं 1971का पाकिस्तान युद्द, एवं 1977 का आपातकाल जैसे राष्ट्रीय संकट के समय भी कर्मचारियो के वेतन भत्तो मे कटौती नही की गयी थी। उन्होंने आगे कहा, एनडीए सरकार द्वारा लगातार कर्मचारी विरोधी निर्णय लिया गया है, पूर्व मे 2004 मे पेंशन बंद का आदेश जारी किया गया, जो की बाद मे पूरे देश मे लागू हुआ, वर्तमान केन्द्र सरकार ने वेतन आयोग समाप्त करने का निर्णय लिया, और अब महंगाई भत्ते पर कटौती का निर्णय कर्मचारियो को महंगाई के बोझ से दबा कर आर्थिक संकट मे डालने वाला निर्णय है।
छग के कर्मचारीयो को जुलाई 2019से 5%महंगाई भत्ता नही मिला है वर्तमान मे छग के कर्मचारी मध्य प्रदेश से भी पीछे है ऐसे मे केन्द्र का यह निर्णय कर्मचारियो को हतोत्साहित करेगा, श्री तिवारी ने बताया की ऐसे समय मे सरकार को कर्मचारियो को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए एवं बुलेट ट्रेन जैसे बड़े व्यय वाले प्रोजक्ट के पैसे को उपयोग करके आर्थिक संरचना को मजबूत करना चाहिऐ वर्तमान मे ट्रेन तो चल नही रही तो बुलेट ट्रेन की परिकल्पना समझ के परे है संघ का केन्द्र सरकार से मांग है, कि कर्मचारी विरोधी निर्णय वापस ले कर अन्य फिजूल खर्च पर रोक लगाये क्योंकि भविष्य मे लाक डाउन के समाप्त होने पर महगाई चरम पर होगी ऐसे मे नौकरी पेशा वर्ग पर महगाई की मार असहनीय होगी और कर्मचारियो की कार्य क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा यदि यह कर्मचारी विरोधी निर्णय वापस नही लिया गया तो छग प्रदेश लिपिक संघ सड़क पर आकर इसका विरोध करेगा।

GiONews Team
Editor In Chief

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बिलासपुर– केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियो के महंगाई भत्ते पर जुलाई 2021तक कटौती करने के निर्णय का छग प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने विरोध किया है, संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने बयान जारी कर कहा, कि एक तरफ कोरोना का कहर देश भर मे फैला हुआ है लोग लाक डाउन मे घरो मे कैद है ऐसी विपरीत परिस्थति मे कर्मचारी वर्ग अपना दायित्व जान जोखिम मे लगाकर निर्वहन कर रहे है स्वास्थ विभाग, सहित अन्य विभाग के कर्मचारी कार्यालयों मे जाकर शासन का कार्य पूरी निष्ठा से कर रहे है ऐसी परिस्थति मे जहां कर्मचारियो को प्रोत्साहन की आवश्यकता है वहां महंगाई भत्ते पर जुलाई 2021तक कटौती का निर्णय केन्द्र सरकार का देश के नौकरी पेशा वर्ग एवं पेंशनरों पर आर्थिक आघात है।

आजादी के बाद 1962 चाइना युद्ध, 1965 एवं 1971का पाकिस्तान युद्द, एवं 1977 का आपातकाल जैसे राष्ट्रीय संकट के समय भी कर्मचारियो के वेतन भत्तो मे कटौती नही की गयी थी। उन्होंने आगे कहा, एनडीए सरकार द्वारा लगातार कर्मचारी विरोधी निर्णय लिया गया है, पूर्व मे 2004 मे पेंशन बंद का आदेश जारी किया गया, जो की बाद मे पूरे देश मे लागू हुआ, वर्तमान केन्द्र सरकार ने वेतन आयोग समाप्त करने का निर्णय लिया, और अब महंगाई भत्ते पर कटौती का निर्णय कर्मचारियो को महंगाई के बोझ से दबा कर आर्थिक संकट मे डालने वाला निर्णय है।
छग के कर्मचारीयो को जुलाई 2019से 5%महंगाई भत्ता नही मिला है वर्तमान मे छग के कर्मचारी मध्य प्रदेश से भी पीछे है ऐसे मे केन्द्र का यह निर्णय कर्मचारियो को हतोत्साहित करेगा, श्री तिवारी ने बताया की ऐसे समय मे सरकार को कर्मचारियो को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए एवं बुलेट ट्रेन जैसे बड़े व्यय वाले प्रोजक्ट के पैसे को उपयोग करके आर्थिक संरचना को मजबूत करना चाहिऐ वर्तमान मे ट्रेन तो चल नही रही तो बुलेट ट्रेन की परिकल्पना समझ के परे है संघ का केन्द्र सरकार से मांग है, कि कर्मचारी विरोधी निर्णय वापस ले कर अन्य फिजूल खर्च पर रोक लगाये क्योंकि भविष्य मे लाक डाउन के समाप्त होने पर महगाई चरम पर होगी ऐसे मे नौकरी पेशा वर्ग पर महगाई की मार असहनीय होगी और कर्मचारियो की कार्य क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा यदि यह कर्मचारी विरोधी निर्णय वापस नही लिया गया तो छग प्रदेश लिपिक संघ सड़क पर आकर इसका विरोध करेगा।