Tuesday, August 16, 2022

महिला का मतलब बहु क्यों? कानून का हो रहा दुरुपयोग- सेव इंडियन फैमिली

बिलासपुर– अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके “सेव इंडियन फैमिली” के सदस्यों ने आज बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा की, और कहा, कि महिलाओं को अधिकार के नाम पर केवल बहू को इतने ज्यादा अधिकार दे दिए गए हैं, कि कई महिलाएं इसका दुरुपयोग कर रही हैं, जिसकी शिकार भी महिलाएं हो रही है, अपनी बातों को सही करार देते हुए, उन्होंने आंकड़े गिनाए, और सरकार को इस ओर ध्यान देकर कानून में बदलाव करने की बात कही।

सेव् इंडियन फैमिली के सदस्यों ने कहा, कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश मे महिला सशक्तिकरण एवं उनके अधिकारों के पक्ष में अनेक कार्यक्रम एवम चर्चाऐं हो रहीं हैं। वर्तमान समय में संचार के विभिन्न माध्यमों जैसे- टी.वी., समाचार पत्र, सोशलमीडिया आदि में महिला सशक्तिकरण के बारे में पढ़कर बहुत अच्छा लगता है, किंतु वास्तविकता इन सबसे परे है।


“महिला एवं बालविकास मंत्रालय” एवं “महिलाआयोग” तथा विभिन्न महिलावादी संगठनों के द्वारा “महिला” की परिभाषा को एक पक्ष विशेष तक सीमित कर, एक बहुत बड़े वर्ग को अनदेखा किया जा रहा है।
वास्तविकता में कानून एवं विभिन्न महिलावादी संगठनों की परिभाषा में असली महिला का मतलब केवल और केवल “बहू” है, उनके लिए सास, ननद, भाभी और देवरानी,जेठानी, मामी, चाची आदि महिला की परिभाषा में नहीं आते। तभी इन संगठनों ने “बहूओं” के पक्ष में ढेरों कानून बनाकर “बहुओं” को महिलाओं के उत्पीड़न एवं शोषण का कानूनी अधिकार दे दिया है, जिसका दुरुपयोग वर्तमान में चरम पर पहुंच गया है। 498A दहेज उत्पीड़न के मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2013 से 2018 तक 210051 की गिरफ्तार की गईं हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2013 से 2018 तक कुल 3068 महिलाओं की गिफ्तारी हुई है। 498A दहेज उत्पीड़न के मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2013 से 2018 तक प्रति प्रकरण 1.59 प्रतिशत व्यक्तियों को गिरफ्तार होना पड़ा है। इस तरह 498ए दहेज उत्पीड़न के मामले में छत्तीसगढ़ स्तर पर वर्ष 2013 से 2018 तक प्रति प्रकरण 2.6 प्रतिशत व्यक्तियों को गिरफ्तार होना पड़ा है। आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है की छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की गिरफ्तारी की दर राष्ट्रीय स्तर से कहीं ज्यादा है। 498ए में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2018 मे सजा कि दर मात्र 11.9 प्रतिशत है।
महिला सशक्तिकरण के इस वर्तमान दौर में झूठे 498ए (दहेज प्रकरण), घरेलू हिंसा(DV) जैसे अन्य धाराओं का दुरुपयोग करके अपने ही घर के दूसरी महिलाओं जैसे सास, नंनद और भाभी को प्रताड़ित किया जा रहा है। इन कानूनों के प्रावधानों का दुरुपयोग कर बूढ़ी सास, ननंद, भाभी तथा पति परिवार की अन्य महिलाओं को गिरफ्तार करवा कर जेल में निरुद्ध करवा दिया जा रहा है, और जिन्होंने ताउम्र कोर्ट कचहरी नहीं देखी है, उन्हें उम्र के इस पड़ाव में कोट कचहरी के चक्कर काटकर एड़िया घीसनीं पड़ रही है।

महिला वादी कानूनों के दुष्परिणाम

  1. भारत में पिछले 6 वर्षों (2013 से 2018) तक 210051 महिलाएं 498ए (दहेज प्रकरण) के कारण जेल में निरुद्ध की गई है।

2.भारत में घरेलू हिंसा (DV) कानून के “राइट टू रेसीडेंस” प्रावधानों का दुरुपयोग कर बुजुर्गों को उनकी स्वयं की जमा पूंजी से निर्मित मकान से पृथक कर दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर किया जा रहा है।

  1. भारत में वर्ष 2018 में लगभग 92114 पुरुष आत्महत्या किए हैं जिनमें 64791 वैवाहिक पुरुष थे। प्रतिवर्ष पुरुष आत्महत्या की दर महिलाओं की तुलना में लगभग दुगनी है, जिनमें अधिकांशतः आत्महत्या घरेलू विवाद एवं महिला वादी कानूनों के दुरूपयोग की वजह से हो रही है।

पुरुषों की इन आत्महत्याओं में

(अ) महिलाओं को अपने बेटों की आत्महत्याओं में,
(ब) ननदो को अपने भाइयों की आत्महत्याओं में,
(स) भाभियों को अपने देवरो की आत्महत्याओं में,
न्याय पाने हेतु दर-दर की ठोकरें खाने पड़ रही है और इसके विपरीत पत्नी (बहू ) के द्वारा आत्महत्या करने पर पत्नी परिवार द्वारा 304 ( बी ) दहेज हत्या के आरोप मात्र से पति परिवार के पूरे खानदान को जेल में ठूंस दिया जाता है।

(4) महिलावादी कानून असल में महिलावादी कानून न होकर “बहूवादी” कानून हैं, एवं “महिला एवं बाल विकास” मंत्रालय तथा महिला आयोग असल में “बहु / पत्नी मंत्रालय” और “बहू/पत्नी आयोग” है क्योंकि इनकी नजरों में सास, ननंद, भाभी, चाची, मामी महिलाऐं नहीं है। "सेव इंडियन फैमिली बिलासपुर" कानून एवं भारतसरकार के द्वारा भुला दी गई महिला के अधिकारों को आवाज उठाने का कार्य कर रहा है।

जब तक इन “भुला दी गई महिलाओं (सास ननंद भाभी चाची) के न्याय के लिए कानूनों में आवश्यक बदलाव नहीं हो जाता तब तक यह” अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” और महिला सशक्तिकरण इनके लिए “बेमानी” है।
आज के इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अरुणा दुबे, अनुसूया शर्मा, दिव्या रानी, विद्या कश्यप, राजश्री परिहार एवं अन्य महिला सदस्य एवं “सेव इंडिया फैमिली बिलासपुर” सम्मिलित हुए।

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सेव् इंडियन फैमिली के सदस्यों ने कहा, कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश मे महिला सशक्तिकरण एवं उनके अधिकारों के पक्ष में अनेक कार्यक्रम एवम चर्चाऐं हो रहीं हैं। वर्तमान समय में संचार के विभिन्न माध्यमों जैसे- टी.वी., समाचार पत्र, सोशलमीडिया आदि में महिला सशक्तिकरण के बारे में पढ़कर बहुत अच्छा लगता है, किंतु वास्तविकता इन सबसे परे है।


“महिला एवं बालविकास मंत्रालय” एवं “महिलाआयोग” तथा विभिन्न महिलावादी संगठनों के द्वारा “महिला” की परिभाषा को एक पक्ष विशेष तक सीमित कर, एक बहुत बड़े वर्ग को अनदेखा किया जा रहा है।
वास्तविकता में कानून एवं विभिन्न महिलावादी संगठनों की परिभाषा में असली महिला का मतलब केवल और केवल “बहू” है, उनके लिए सास, ननद, भाभी और देवरानी,जेठानी, मामी, चाची आदि महिला की परिभाषा में नहीं आते। तभी इन संगठनों ने “बहूओं” के पक्ष में ढेरों कानून बनाकर “बहुओं” को महिलाओं के उत्पीड़न एवं शोषण का कानूनी अधिकार दे दिया है, जिसका दुरुपयोग वर्तमान में चरम पर पहुंच गया है। 498A दहेज उत्पीड़न के मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2013 से 2018 तक 210051 की गिरफ्तार की गईं हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2013 से 2018 तक कुल 3068 महिलाओं की गिफ्तारी हुई है। 498A दहेज उत्पीड़न के मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2013 से 2018 तक प्रति प्रकरण 1.59 प्रतिशत व्यक्तियों को गिरफ्तार होना पड़ा है। इस तरह 498ए दहेज उत्पीड़न के मामले में छत्तीसगढ़ स्तर पर वर्ष 2013 से 2018 तक प्रति प्रकरण 2.6 प्रतिशत व्यक्तियों को गिरफ्तार होना पड़ा है। आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है की छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की गिरफ्तारी की दर राष्ट्रीय स्तर से कहीं ज्यादा है। 498ए में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2018 मे सजा कि दर मात्र 11.9 प्रतिशत है।
महिला सशक्तिकरण के इस वर्तमान दौर में झूठे 498ए (दहेज प्रकरण), घरेलू हिंसा(DV) जैसे अन्य धाराओं का दुरुपयोग करके अपने ही घर के दूसरी महिलाओं जैसे सास, नंनद और भाभी को प्रताड़ित किया जा रहा है। इन कानूनों के प्रावधानों का दुरुपयोग कर बूढ़ी सास, ननंद, भाभी तथा पति परिवार की अन्य महिलाओं को गिरफ्तार करवा कर जेल में निरुद्ध करवा दिया जा रहा है, और जिन्होंने ताउम्र कोर्ट कचहरी नहीं देखी है, उन्हें उम्र के इस पड़ाव में कोट कचहरी के चक्कर काटकर एड़िया घीसनीं पड़ रही है।

महिला वादी कानूनों के दुष्परिणाम

  1. भारत में पिछले 6 वर्षों (2013 से 2018) तक 210051 महिलाएं 498ए (दहेज प्रकरण) के कारण जेल में निरुद्ध की गई है।

2.भारत में घरेलू हिंसा (DV) कानून के “राइट टू रेसीडेंस” प्रावधानों का दुरुपयोग कर बुजुर्गों को उनकी स्वयं की जमा पूंजी से निर्मित मकान से पृथक कर दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर किया जा रहा है।

  1. भारत में वर्ष 2018 में लगभग 92114 पुरुष आत्महत्या किए हैं जिनमें 64791 वैवाहिक पुरुष थे। प्रतिवर्ष पुरुष आत्महत्या की दर महिलाओं की तुलना में लगभग दुगनी है, जिनमें अधिकांशतः आत्महत्या घरेलू विवाद एवं महिला वादी कानूनों के दुरूपयोग की वजह से हो रही है।

पुरुषों की इन आत्महत्याओं में

(अ) महिलाओं को अपने बेटों की आत्महत्याओं में,
(ब) ननदो को अपने भाइयों की आत्महत्याओं में,
(स) भाभियों को अपने देवरो की आत्महत्याओं में,
न्याय पाने हेतु दर-दर की ठोकरें खाने पड़ रही है और इसके विपरीत पत्नी (बहू ) के द्वारा आत्महत्या करने पर पत्नी परिवार द्वारा 304 ( बी ) दहेज हत्या के आरोप मात्र से पति परिवार के पूरे खानदान को जेल में ठूंस दिया जाता है।

(4) महिलावादी कानून असल में महिलावादी कानून न होकर “बहूवादी” कानून हैं, एवं “महिला एवं बाल विकास” मंत्रालय तथा महिला आयोग असल में “बहु / पत्नी मंत्रालय” और “बहू/पत्नी आयोग” है क्योंकि इनकी नजरों में सास, ननंद, भाभी, चाची, मामी महिलाऐं नहीं है। "सेव इंडियन फैमिली बिलासपुर" कानून एवं भारतसरकार के द्वारा भुला दी गई महिला के अधिकारों को आवाज उठाने का कार्य कर रहा है।

जब तक इन “भुला दी गई महिलाओं (सास ननंद भाभी चाची) के न्याय के लिए कानूनों में आवश्यक बदलाव नहीं हो जाता तब तक यह” अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” और महिला सशक्तिकरण इनके लिए “बेमानी” है।
आज के इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अरुणा दुबे, अनुसूया शर्मा, दिव्या रानी, विद्या कश्यप, राजश्री परिहार एवं अन्य महिला सदस्य एवं “सेव इंडिया फैमिली बिलासपुर” सम्मिलित हुए।