Saturday, December 3, 2022

महिलाओं को जागरूक करने में जुटी ‘द विजडम ट्री’

बिलासपुर– किसी देश का विकास महिलाओं के विकास के समानुपाती होता है। महिलाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य, को लेकर जागरुकता देश के विकास के पैमाने होते हैं। समाज के रुढ़िवादी होने की कीमत अक्सर समाज के सबसे पिछड़े हिस्सों में से एक महिलाओं को चुकानी पड़ती है। पीरियड यानी माहवारी को लेकर हमारे समाज में अभी भी भ्रम है, ये एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में आज भी हम खुल कर बात नहीं करते, जिसकी वजह से अक्सर ही महिलाओं को अनेक भयानक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। माहवारी के बारे में जागरूकता न होने से समाज का पिछड़ापन और मानसिक दिवालियापन उजागर होता है। माहवारी की समस्याओं से बचने के कई उपायों में से एक है सैनिटरी नैपकिन।

द विज़डम ट्री फाउंडेशन की फाउंडर एवं चौकसे ग्रुप ऑफ कॉलेजेस की निदेशिका डॉ पलक जायसवाल अपने महिला स्वयंसेवको के साथ ग्राम छतौना, हाफा और बैमा-नागोई की महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन का वितरण किया, और उसके बारे में जानकारियां देते हुए सैनिटरी नैपकिन के प्रयोग न करने से महिलाओं में जो अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है, उनके बारे में जानकारियाँ भी दी गई।

उन्होंने बताया, सैनिटरी नैपकिन की सबसे बड़ी समस्या एक ही नैपकिन का लम्बे समय तक प्रयोग करना है। माहवारी और सैनिटरी नैपकिन को लेकर जनमानस को जागरूक करने वाली द विज़डम ट्री फाउंडेशन के महिला स्वयंसेवको ने बताया की सैनिटरी नैपकिन प्रयोग करने वाली अधिकतर महिलाएं 12 से 15 घंटे तक एक ही सैनिटरी नैपकिन प्रयोग करती हैं जिससे महिलाओं में होने वाले इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से यूटेरस इंफेक्शन, बांझपन आदि जैसी घातक बीमारिय़ां हो सकती हैं। इसीलिए माहवारी के समय में एक सैनिटरी नैपकिन को हर 6 से 8 घंटे बाद बदल कर नए नैपकिन का प्रयोग करना चाहिए।

इस अभियान में द विज़डम ट्री फाउंडेशन ने छतौना में 150 घरो में 500 सैनिटरी नैपकिन, हाफा में 180 घरो में 500 सैनिटरी नैपकिन और बैमा-नागोई में 200 घरो की 500 सैनिटरी नैपकिन और 100 मास्क महिलाओं को वितरित किया।

महिलाओं को COVID-19 के संक्रमण से बचने के उपाय जैसे साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोना, किसी भी व्यक्ति से 3 मीटर की दूरी बनाए रखना, घर मे साफ सफाई रखना, खासी या छिक आने पर मुह पर रुमाल रखना इत्यादि जानकारियां दी।

द विज़डम ट्री फॉउंडेशन की फाउंडर डॉ पलक जायसवाल ने बताया, कि कल यानी 19 अप्रैल और आगे आने वाले दिन में जो दूसरे प्रान्तों से आये हुए लोगों को जहां प्रशासन ने ठहराया है, वहां मोटिवेशनल मूवीज एवं उनके प्रान्तीय सिनेमा दिखाया जाएगा।

GiONews Team
Editor In Chief

4 COMMENTS

  1. If you understand this and share my vision then I hope we get to know each other well.
    my lush levels. MY LUSH LEVELS ♥ [1 to 15 tokens] LUSH = 3 SEC (Low Vibrations) [16 to 24 tokens] LUSH = 7 SEC
    (Medium Vibrations) [25 to 25 tokens] LUSH = 25 SEC (Ultra high Vibrations) [26 to 48 tokens] LUSH =
    15 SEC (Medium Vibrations) [49 to 49 tokens.

  2. Editör: 15Haber. 16:57. Rize’de denize giren yaşlı adam boğuldu, Anlık
    Son dakika haberinden alınan bilgilere göre: Rize’nin Pazar ilçesinde
    serinlemek için denize giren 54 yaşındaki kişi boğuldu.
    Olay, Hamidiye semtinde meydana geldi. Edinilen bilgiye göre,
    Hamidiye bölgesinde yüzen vatandaşlar, denizde yüzen bir ceset olduğunu.

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बिलासपुर– किसी देश का विकास महिलाओं के विकास के समानुपाती होता है। महिलाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य, को लेकर जागरुकता देश के विकास के पैमाने होते हैं। समाज के रुढ़िवादी होने की कीमत अक्सर समाज के सबसे पिछड़े हिस्सों में से एक महिलाओं को चुकानी पड़ती है। पीरियड यानी माहवारी को लेकर हमारे समाज में अभी भी भ्रम है, ये एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में आज भी हम खुल कर बात नहीं करते, जिसकी वजह से अक्सर ही महिलाओं को अनेक भयानक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। माहवारी के बारे में जागरूकता न होने से समाज का पिछड़ापन और मानसिक दिवालियापन उजागर होता है। माहवारी की समस्याओं से बचने के कई उपायों में से एक है सैनिटरी नैपकिन।

द विज़डम ट्री फाउंडेशन की फाउंडर एवं चौकसे ग्रुप ऑफ कॉलेजेस की निदेशिका डॉ पलक जायसवाल अपने महिला स्वयंसेवको के साथ ग्राम छतौना, हाफा और बैमा-नागोई की महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन का वितरण किया, और उसके बारे में जानकारियां देते हुए सैनिटरी नैपकिन के प्रयोग न करने से महिलाओं में जो अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है, उनके बारे में जानकारियाँ भी दी गई।

उन्होंने बताया, सैनिटरी नैपकिन की सबसे बड़ी समस्या एक ही नैपकिन का लम्बे समय तक प्रयोग करना है। माहवारी और सैनिटरी नैपकिन को लेकर जनमानस को जागरूक करने वाली द विज़डम ट्री फाउंडेशन के महिला स्वयंसेवको ने बताया की सैनिटरी नैपकिन प्रयोग करने वाली अधिकतर महिलाएं 12 से 15 घंटे तक एक ही सैनिटरी नैपकिन प्रयोग करती हैं जिससे महिलाओं में होने वाले इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से यूटेरस इंफेक्शन, बांझपन आदि जैसी घातक बीमारिय़ां हो सकती हैं। इसीलिए माहवारी के समय में एक सैनिटरी नैपकिन को हर 6 से 8 घंटे बाद बदल कर नए नैपकिन का प्रयोग करना चाहिए।

इस अभियान में द विज़डम ट्री फाउंडेशन ने छतौना में 150 घरो में 500 सैनिटरी नैपकिन, हाफा में 180 घरो में 500 सैनिटरी नैपकिन और बैमा-नागोई में 200 घरो की 500 सैनिटरी नैपकिन और 100 मास्क महिलाओं को वितरित किया।

महिलाओं को COVID-19 के संक्रमण से बचने के उपाय जैसे साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोना, किसी भी व्यक्ति से 3 मीटर की दूरी बनाए रखना, घर मे साफ सफाई रखना, खासी या छिक आने पर मुह पर रुमाल रखना इत्यादि जानकारियां दी।

द विज़डम ट्री फॉउंडेशन की फाउंडर डॉ पलक जायसवाल ने बताया, कि कल यानी 19 अप्रैल और आगे आने वाले दिन में जो दूसरे प्रान्तों से आये हुए लोगों को जहां प्रशासन ने ठहराया है, वहां मोटिवेशनल मूवीज एवं उनके प्रान्तीय सिनेमा दिखाया जाएगा।