Monday, November 28, 2022

मुंगेली निर्वाचन विभाग में 33 लाख की बजाय 80 लाख भुगतान का मामला, बिना दस्तावेज सत्यापन के पीड़ित को भगाया

बिलासपुर– विधानसभा 2018 मे निर्वाचन के दौरान विडियोग्राफी के लिए ठेका दिया गया था, जिसमें फर्म महामाया स्टूडियो लोरमी के प्रोपाइटर आशीष कुमार कश्यप ने यह दावा किया है, कि विधानसभा निर्वाचन 2018 की विडियोग्राफी के लिए उन्हें टेण्डर दिया गया था, और उनके द्वारा सारी औपचारिक्ताऐं पूरी कर विडियोग्राफी की थी, जिसके उपरांत मुंगेली निर्वाचन अधिकारी द्वारा बाकायदा प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। वहीं फर्म से मिलता जुलता नाम “महामाया फोटो स्टूडियो लोरमी” प्रो. महेन्द्र द्वारा स्वयं के फर्म को टेण्डर मिलने का दावा किया गया, साथ ही अधिकारियों से मिलिभगत कर करीब 80 लाख का भुगतान करा लिया गया।

वहीं उन्होंने बताया, कि वे राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित बिलासपुर आईजी से जांच हेतु आवेदन दिये हैं। जहाँ मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच टीम गठित की गई है। जो कि दस्तावेज जांच के लिए आशीष कश्यप को पत्र के माध्यम से 24 जनवरी को तलब किया गया था। जहाँ आशीष कश्यप अपना दस्तावेज लेकर अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हुआ, इस दौरान अधिकारी ने जांच तो दूर दस्तावेज पर ध्यान ही नही दिया…बल्कि निर्वाचन सुपरवाईजर से दस्तावेज सत्यापन कराने बात कही गई…जबकि संबंधित सुपरवाइजर पर ही दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने का आरोप लगा हुआ है। फिर भी वे जांच कराने गया जहाँ संबंधित सुपरवाइजर द्वारा एफआईआर कराने की धमकी देते हुए भगा दिया गया।

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बिलासपुर– विधानसभा 2018 मे निर्वाचन के दौरान विडियोग्राफी के लिए ठेका दिया गया था, जिसमें फर्म महामाया स्टूडियो लोरमी के प्रोपाइटर आशीष कुमार कश्यप ने यह दावा किया है, कि विधानसभा निर्वाचन 2018 की विडियोग्राफी के लिए उन्हें टेण्डर दिया गया था, और उनके द्वारा सारी औपचारिक्ताऐं पूरी कर विडियोग्राफी की थी, जिसके उपरांत मुंगेली निर्वाचन अधिकारी द्वारा बाकायदा प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। वहीं फर्म से मिलता जुलता नाम “महामाया फोटो स्टूडियो लोरमी” प्रो. महेन्द्र द्वारा स्वयं के फर्म को टेण्डर मिलने का दावा किया गया, साथ ही अधिकारियों से मिलिभगत कर करीब 80 लाख का भुगतान करा लिया गया।

वहीं उन्होंने बताया, कि वे राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित बिलासपुर आईजी से जांच हेतु आवेदन दिये हैं। जहाँ मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच टीम गठित की गई है। जो कि दस्तावेज जांच के लिए आशीष कश्यप को पत्र के माध्यम से 24 जनवरी को तलब किया गया था। जहाँ आशीष कश्यप अपना दस्तावेज लेकर अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हुआ, इस दौरान अधिकारी ने जांच तो दूर दस्तावेज पर ध्यान ही नही दिया…बल्कि निर्वाचन सुपरवाईजर से दस्तावेज सत्यापन कराने बात कही गई…जबकि संबंधित सुपरवाइजर पर ही दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने का आरोप लगा हुआ है। फिर भी वे जांच कराने गया जहाँ संबंधित सुपरवाइजर द्वारा एफआईआर कराने की धमकी देते हुए भगा दिया गया।