Tuesday, August 16, 2022

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल.. दूसरे राज्यो में फंसे प्रदेश के 26.5 हजार श्रमिकों को पहुंचाई गई राहत.. 316 श्रमिकों के खाते में जमा किये गए 14.41 लाख

रायपुर– लॉकडाउन से प्रभावित छत्तीसगढ़ प्रदेश के अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशन में राज्य सरकार ने आज तक के संकटग्रस्त 26 हजार 505 श्रमिकों को राहत पहुंचायी है। इनमें अब तक पांच हजार 316 श्रमिकों के खाते में तत्कालिक व्यवस्था के लिए लगभग 14 लाख 41 हजार रूपए भी जमा करवाया गया है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक 20 अन्य राज्यों एवं तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में संकट की स्थिति में होने के संबंध में जानकारी मिली है।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जम्मू में फंसे लगभग तीन हजार श्रमिकों के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर उनके रहने-खाने की व्यवस्था करायी गई है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के धरमशाला में फंसे लगभग 900 श्रमिकों के लिए राशन आदि सामग्री की व्यवस्था की गई। इसके अलावा इन श्रमिकों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए जिला बेमेतरा के 3660 श्रमिकों के खाते में 10 लाख 95 हजार रूपए, मुंगेली जिले के 1483 श्रमिकों के खातें में एक लाख 73 हजार रूपए और कबीरधाम जिले के 173 श्रमिकों के खातें में प्रति श्रमिक 1000 रूपए की मान से एक लाख 73 हजार रूपए जमा कराया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा देश के अन्य राज्यों में श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए अधिकारियों का दल गठित कर सतत् निगरानी की जा रही है। इसके लिए श्रम विभाग द्वारा राज्य स्तर पर हेल्पलाईन नम्बर 0771-2443809, 91098-49992, 75878-22800 सहित जिला स्तर पर भी हेल्पलाईन नम्बर स्थापित किए गए हैं। हेल्पलाईन नम्बर के माध्यम से प्राप्त श्रमिकों की समस्याओं को पंजीबद्ध कर तत्काल यथासंभव समाधान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशन पर श्रम विभाग के सचिव सोनमणी बोरा के मार्गदर्शन में अन्य प्रदेशों के स्थानीय प्रशासन से सतत् समन्वय कर श्रमिकों की समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान किया जा रहा है।

श्रम विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि लॉकडाउन के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में संकटग्रस्त एवं जरूरतमंद श्रमिक जो अन्य राज्यो में फंसे हुए है। छत्तीसगढ़ के 26 जिलों के श्रमिक 20 अन्य राज्यों एवं तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में फंसे होने की जानकारी मिली है। सबसे ज्यादा श्रमिक महाराष्ट्र में 5 हजार 591, उत्तरप्रदेश में 4 हजार 578, तेलंगाना में 3 हजार 92, गुजरात में 2 हजार 994, जम्मू में 3 हजार 677 और कर्नाटक में 880 श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में 1 हजार 66, आंध्रप्रदेश में 652, दिल्ली में 596 और तमिलनाडू में 677 श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी हेल्पलाईन नम्बर सहित विभिन्न माध्यमों से मिली है।

अधिकारियों में बताया कि लॉकडाउन के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में संकटग्रस्त अथवा फंसे हुए श्रमिकों में छत्तीसगढ़ के मुंगेली से 3762, कबीरधाम से 3896, राजनांदगांव से 3303, जांजगीर-चांपा से 2683, बलौदाबाजार से 3612, बेमेतरा से 2749, रायगढ़ से 997, बिलासपुर से 1500, बलरामपुर से 373, सूरजपुर से 468, दुर्ग से 309, बालोद से 245, गरियाबंद से 369, रायपुर से 1306 और कोरबा जिले से 366 श्रमिक फंसे हुए है। जिनकी राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों द्वारा अन्य राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों, कारखाना प्रबंधकों, नियोजकों और ठेकेदारों से समन्वय कर सतत् निगरानी की जा रही है तथा उनके खाने-पीने, रहने आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

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रायपुर– लॉकडाउन से प्रभावित छत्तीसगढ़ प्रदेश के अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशन में राज्य सरकार ने आज तक के संकटग्रस्त 26 हजार 505 श्रमिकों को राहत पहुंचायी है। इनमें अब तक पांच हजार 316 श्रमिकों के खाते में तत्कालिक व्यवस्था के लिए लगभग 14 लाख 41 हजार रूपए भी जमा करवाया गया है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक 20 अन्य राज्यों एवं तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में संकट की स्थिति में होने के संबंध में जानकारी मिली है।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जम्मू में फंसे लगभग तीन हजार श्रमिकों के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर उनके रहने-खाने की व्यवस्था करायी गई है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के धरमशाला में फंसे लगभग 900 श्रमिकों के लिए राशन आदि सामग्री की व्यवस्था की गई। इसके अलावा इन श्रमिकों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए जिला बेमेतरा के 3660 श्रमिकों के खाते में 10 लाख 95 हजार रूपए, मुंगेली जिले के 1483 श्रमिकों के खातें में एक लाख 73 हजार रूपए और कबीरधाम जिले के 173 श्रमिकों के खातें में प्रति श्रमिक 1000 रूपए की मान से एक लाख 73 हजार रूपए जमा कराया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा देश के अन्य राज्यों में श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए अधिकारियों का दल गठित कर सतत् निगरानी की जा रही है। इसके लिए श्रम विभाग द्वारा राज्य स्तर पर हेल्पलाईन नम्बर 0771-2443809, 91098-49992, 75878-22800 सहित जिला स्तर पर भी हेल्पलाईन नम्बर स्थापित किए गए हैं। हेल्पलाईन नम्बर के माध्यम से प्राप्त श्रमिकों की समस्याओं को पंजीबद्ध कर तत्काल यथासंभव समाधान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशन पर श्रम विभाग के सचिव सोनमणी बोरा के मार्गदर्शन में अन्य प्रदेशों के स्थानीय प्रशासन से सतत् समन्वय कर श्रमिकों की समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान किया जा रहा है।

श्रम विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि लॉकडाउन के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में संकटग्रस्त एवं जरूरतमंद श्रमिक जो अन्य राज्यो में फंसे हुए है। छत्तीसगढ़ के 26 जिलों के श्रमिक 20 अन्य राज्यों एवं तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में फंसे होने की जानकारी मिली है। सबसे ज्यादा श्रमिक महाराष्ट्र में 5 हजार 591, उत्तरप्रदेश में 4 हजार 578, तेलंगाना में 3 हजार 92, गुजरात में 2 हजार 994, जम्मू में 3 हजार 677 और कर्नाटक में 880 श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में 1 हजार 66, आंध्रप्रदेश में 652, दिल्ली में 596 और तमिलनाडू में 677 श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी हेल्पलाईन नम्बर सहित विभिन्न माध्यमों से मिली है।

अधिकारियों में बताया कि लॉकडाउन के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में संकटग्रस्त अथवा फंसे हुए श्रमिकों में छत्तीसगढ़ के मुंगेली से 3762, कबीरधाम से 3896, राजनांदगांव से 3303, जांजगीर-चांपा से 2683, बलौदाबाजार से 3612, बेमेतरा से 2749, रायगढ़ से 997, बिलासपुर से 1500, बलरामपुर से 373, सूरजपुर से 468, दुर्ग से 309, बालोद से 245, गरियाबंद से 369, रायपुर से 1306 और कोरबा जिले से 366 श्रमिक फंसे हुए है। जिनकी राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों द्वारा अन्य राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों, कारखाना प्रबंधकों, नियोजकों और ठेकेदारों से समन्वय कर सतत् निगरानी की जा रही है तथा उनके खाने-पीने, रहने आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।