Thursday, December 8, 2022

रिसर्च: देश में कोरोना संक्रमितों को संख्या हो सकती है 13 लाख!! हालात गंभीर..सावधानी ज़रूरी

डेस्क– वैज्ञानिकों ने भारत में दो माह में कोरोना वायरस संक्रमित मामलों की संख्या 13 लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया है। शोध के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में मई के मध्य तक 1 लाख से 13 मरीज होने की बात कही गई है। रिपोर्ट ‘सीओवी-आईएनडी-19’ में कहा गया है, कि महामारी के शुरूआती चरण में अमेरिका और इटली के मुकाबले भारत पॉजीटिव मामलों को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफल रहा है, लेकिन भारत में वायरस से सचमुच में प्रभावित मामलों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।

अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय की देबश्री रॉय के साथ वैज्ञानिकों की टीम ने शोध किया है। वैज्ञानिकों ने कहा, कि यह बात जांच के दायरे, जांच के नतीजों की सटीकता और उन लोगों की जांच पर निर्भर करती है। जिनमें इस वायरस से संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है अभी तक, भारत में जांच किये गये लोगों की संख्या तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। व्यापक जांच नहीं होने की स्थिति में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण को रोक पाना असंभव है।

इसका यह मतलब है, कि हम यह आंकलन नहीं कर सकते, कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों के बाहर कितनी संख्या में संक्रमित व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा, ”भारत के लिये यह जरूरी है, कि वह देश में कोरोना वायरस संक्रमण के तेजी से फैलने से पहले ‘बेहद कड़े उपायों’ को अपनाये।” वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में 16 मार्च तक भारत में दर्ज मामलों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया।

कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का अनुमान लगाना मुश्किल


रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कोरोना टेस्ट कम हुए हैं। ऐसे में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन कितना भयानक हो सकता है, और भविष्य में इसके आंकड़े कितने बढ़ेंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। 

ऐसे में भारत के लिए बीमारी से निपट पाना असंभव

भारत के लिये लगाये गये उन अनुमानों की तुलना अमेरिका एवं इटली से की। शोध करने वाले वैज्ञानिकों में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, नयी दिल्ली और मिशिगन विश्वविद्यालय, अमेरिका के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। उन्होंने विश्व बैंक के डेटा का जिक्र करते हुए कहा, कि भारत में प्रति 1000 व्यक्ति बेड की संख्या सिर्फ 0.7 है, जबकि फ्रांस में यह 6.5, दक्षिण कोरिया में 11.5, चीन में 4.2, इटली में 3.4 और अमेरिका में 2.8 है। वैज्ञानिकों ने कहा, कि मामलों की संख्या ज्यादा होने पर भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों के लिये इससे निपट पाना असंभव हो जाएगा।

आईसीयू बेड की जरुरत

भारत की आबादी में शामिल जोखिम ग्रस्त समूहों की भी पहचान की गई है। देश में 2014 में बगैर बीमा वाले लोग करोड़ों की संख्या में थे। उन्होंने आगाह किया, कि गंभीर रूप से संक्रमित लोगों को संक्रमितों में से करीब पांच-10 प्रतिशत को आईसीयू बेड की जरूरत होगी। और देश में लगातार आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं

एडवाइजरी का पालन जरूरी
देश मुश्किल हालात से गुजर रहा है, कोरोना पीड़ितों से कौन..कब.. मिला.. इस बारे में आंकड़े इकट्ठे करना बेहद कठिन है, ऐसे में लोगों को संयम बरतने की जरूरत है, और सरकार की एडवाइजरी का पालन करने बेहद जरूरी है, अगर हालात बिगड़े तो सम्हाल पाना मुश्किल हो जाएगा।

देशवासियों से अपील है, आप सभी अपने घरों में रहें, और सरकार के आदेश का पालन करें, ताकि आप और आपका परिवार, देश के रहवासी सुरक्षित रहें।

GiONews Team
Editor In Chief

8 COMMENTS

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डेस्क– वैज्ञानिकों ने भारत में दो माह में कोरोना वायरस संक्रमित मामलों की संख्या 13 लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया है। शोध के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में मई के मध्य तक 1 लाख से 13 मरीज होने की बात कही गई है। रिपोर्ट ‘सीओवी-आईएनडी-19’ में कहा गया है, कि महामारी के शुरूआती चरण में अमेरिका और इटली के मुकाबले भारत पॉजीटिव मामलों को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफल रहा है, लेकिन भारत में वायरस से सचमुच में प्रभावित मामलों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।

अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय की देबश्री रॉय के साथ वैज्ञानिकों की टीम ने शोध किया है। वैज्ञानिकों ने कहा, कि यह बात जांच के दायरे, जांच के नतीजों की सटीकता और उन लोगों की जांच पर निर्भर करती है। जिनमें इस वायरस से संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है अभी तक, भारत में जांच किये गये लोगों की संख्या तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। व्यापक जांच नहीं होने की स्थिति में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण को रोक पाना असंभव है।

इसका यह मतलब है, कि हम यह आंकलन नहीं कर सकते, कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों के बाहर कितनी संख्या में संक्रमित व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा, ”भारत के लिये यह जरूरी है, कि वह देश में कोरोना वायरस संक्रमण के तेजी से फैलने से पहले ‘बेहद कड़े उपायों’ को अपनाये।” वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में 16 मार्च तक भारत में दर्ज मामलों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया।

कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का अनुमान लगाना मुश्किल


रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कोरोना टेस्ट कम हुए हैं। ऐसे में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन कितना भयानक हो सकता है, और भविष्य में इसके आंकड़े कितने बढ़ेंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। 

ऐसे में भारत के लिए बीमारी से निपट पाना असंभव

भारत के लिये लगाये गये उन अनुमानों की तुलना अमेरिका एवं इटली से की। शोध करने वाले वैज्ञानिकों में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, नयी दिल्ली और मिशिगन विश्वविद्यालय, अमेरिका के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। उन्होंने विश्व बैंक के डेटा का जिक्र करते हुए कहा, कि भारत में प्रति 1000 व्यक्ति बेड की संख्या सिर्फ 0.7 है, जबकि फ्रांस में यह 6.5, दक्षिण कोरिया में 11.5, चीन में 4.2, इटली में 3.4 और अमेरिका में 2.8 है। वैज्ञानिकों ने कहा, कि मामलों की संख्या ज्यादा होने पर भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों के लिये इससे निपट पाना असंभव हो जाएगा।

आईसीयू बेड की जरुरत

भारत की आबादी में शामिल जोखिम ग्रस्त समूहों की भी पहचान की गई है। देश में 2014 में बगैर बीमा वाले लोग करोड़ों की संख्या में थे। उन्होंने आगाह किया, कि गंभीर रूप से संक्रमित लोगों को संक्रमितों में से करीब पांच-10 प्रतिशत को आईसीयू बेड की जरूरत होगी। और देश में लगातार आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं

एडवाइजरी का पालन जरूरी
देश मुश्किल हालात से गुजर रहा है, कोरोना पीड़ितों से कौन..कब.. मिला.. इस बारे में आंकड़े इकट्ठे करना बेहद कठिन है, ऐसे में लोगों को संयम बरतने की जरूरत है, और सरकार की एडवाइजरी का पालन करने बेहद जरूरी है, अगर हालात बिगड़े तो सम्हाल पाना मुश्किल हो जाएगा।

देशवासियों से अपील है, आप सभी अपने घरों में रहें, और सरकार के आदेश का पालन करें, ताकि आप और आपका परिवार, देश के रहवासी सुरक्षित रहें।