Friday, August 19, 2022

“सेमरताल के पावन भुंईया” गीत से गांव की वंदना के साथ हुआ नवधा रामायण का समापन

बिलासपुर– संस्कृति और लोक परंपरा के धनी ग्राम सेमरताल में नवधा रामायण के आखरी दिन रामायण आरती के साथ ही ग्राम वंदना का संगीत के साथ सुंदर गायन किया गया।गाँव के अटल समरसता भवन के पास आयोजित अखंड नवधा रामायण में आसपास एवं दूरस्थ गाँवो से आने वाले मानस प्रेमी अपनी प्रस्तुति से मनमोह रहे हैं। ग्रामिणों के लिए आज की शाम की आरती अद्भुत रही, क्योंकि रामायण आरती के बाद ग्राम सेमरताल की वंदना की गई। गाँव के अनिल वर्मा ने छत्तीसगढ़ के राजगीत से प्रेरित होकर ग्राम गीत की रचना छत्तीसगढ़ी भाषा में किया है। ग्राम गीत “सेमरताल के पावन भुंईया, मया म तै महतारी, तोर कोरा खेलेन कूदेन, जुर मिल सब संगवारी ” को गाँव के लोकगायक मनीष कौशिक और राजेन्द्र यादव ने संगीतबद्ध किया है। मनीष कौशिक ने गीत को स्वर दिया है। ग्राम गीत की शानदार रचना के लिए रचनाकार एवं गायक का सम्मान नवधा समिति ने किया समिति किया। नवधा के अंतिम दिन अमतरा से विनोद पोर्ते, पेन्डरवा से ओमप्रकाश कश्यप, बहतराई से मानस मन्डली, कछार से दुर्गा यादव, गतौरी से राजेन्द्र यादव, परमेश साहू, बरपाली से चेतानंद लोनिया, खाड़ा से जवाहर मानिकपुरी, एवं बरभांठा से विकास यादव भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी। सभी टोलियों का सम्मान प्रशस्ति पत्र से किया गया।नवधा को सफल बनाने में कामता धीवर, ओमप्रकाश वर्मा, यदुनंदन कौशिक, लक्ष्मी बैंगुर, रामफल द्विवेदी, दशरथ साहू, रमई साहू,.हरिशंकर धीवर, रामावतार साहू, मनीष कौशिक, रामावतार यादव, साकेत कौशिक, सतीश धीवर, गोपकुमार कौशिक, दीलिप कौशिक, शिवकुमार साहू, रवींद्र गहवई, सरजू साहू, ज्योतिष धीवर, सुभाष धीवर, भगतराम, उमाशंकर साहू, जोगीराम साहू, धनंजय, शिवम कौशिक, राजू यादव एवं अशोक साहू निरंतर सक्रिय रहे।

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बिलासपुर– संस्कृति और लोक परंपरा के धनी ग्राम सेमरताल में नवधा रामायण के आखरी दिन रामायण आरती के साथ ही ग्राम वंदना का संगीत के साथ सुंदर गायन किया गया।गाँव के अटल समरसता भवन के पास आयोजित अखंड नवधा रामायण में आसपास एवं दूरस्थ गाँवो से आने वाले मानस प्रेमी अपनी प्रस्तुति से मनमोह रहे हैं। ग्रामिणों के लिए आज की शाम की आरती अद्भुत रही, क्योंकि रामायण आरती के बाद ग्राम सेमरताल की वंदना की गई। गाँव के अनिल वर्मा ने छत्तीसगढ़ के राजगीत से प्रेरित होकर ग्राम गीत की रचना छत्तीसगढ़ी भाषा में किया है। ग्राम गीत “सेमरताल के पावन भुंईया, मया म तै महतारी, तोर कोरा खेलेन कूदेन, जुर मिल सब संगवारी ” को गाँव के लोकगायक मनीष कौशिक और राजेन्द्र यादव ने संगीतबद्ध किया है। मनीष कौशिक ने गीत को स्वर दिया है। ग्राम गीत की शानदार रचना के लिए रचनाकार एवं गायक का सम्मान नवधा समिति ने किया समिति किया। नवधा के अंतिम दिन अमतरा से विनोद पोर्ते, पेन्डरवा से ओमप्रकाश कश्यप, बहतराई से मानस मन्डली, कछार से दुर्गा यादव, गतौरी से राजेन्द्र यादव, परमेश साहू, बरपाली से चेतानंद लोनिया, खाड़ा से जवाहर मानिकपुरी, एवं बरभांठा से विकास यादव भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी। सभी टोलियों का सम्मान प्रशस्ति पत्र से किया गया।नवधा को सफल बनाने में कामता धीवर, ओमप्रकाश वर्मा, यदुनंदन कौशिक, लक्ष्मी बैंगुर, रामफल द्विवेदी, दशरथ साहू, रमई साहू,.हरिशंकर धीवर, रामावतार साहू, मनीष कौशिक, रामावतार यादव, साकेत कौशिक, सतीश धीवर, गोपकुमार कौशिक, दीलिप कौशिक, शिवकुमार साहू, रवींद्र गहवई, सरजू साहू, ज्योतिष धीवर, सुभाष धीवर, भगतराम, उमाशंकर साहू, जोगीराम साहू, धनंजय, शिवम कौशिक, राजू यादव एवं अशोक साहू निरंतर सक्रिय रहे।