Saturday, August 13, 2022

25 अप्रैल को भगवान परशुराम महोत्सव, संध्या 7 बजे विप्रजन घर में करेंगे पूजा, महाआरती

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद के अध्यक्ष डॉ प्रदीप शुक्ला, प्रधान सचिव संजय शर्मा व कोषाध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया है, कि पंचाग पाठी विप्रजनों ने सुझाया है, कि 25 अप्रैल को प्रातः 11.45 बजे से तृतीया की तिथि है, जो 26 अप्रैल के प्रातः 11.45 तक है, भगवान परशुराम तृतीया तिथि को ही प्रकट हुए थे, अतः उनकी जयंती व प्रकटोत्सव 25 अप्रैल को प्रातः 11.45 बजे के बाद से ही मनाया जा सकता है।

अक्षय तृतीया की तिथि को दान, पुण्य का महत्व होता है, अतः उदयकाल तिथि के आधार 26 अप्रैल को प्रातः 12.45 बजे तक ही पुण्य फल की प्राप्ति होगी।

25 अप्रैल को प्रदोष काल संध्या में है, किन्तु तृतीया तिथि प्रातः 11.45 बजे से प्रारम्भ है, अतः प्रदोष काल मे भी दीप जलाकर पूजा अर्चना, प्रसाद, महाआरती किया जा सकता है, अतः समस्त विप्रजन 25 अप्रैल को ही भगवान परशुराम जी की पूजा, आरती करेंगे।

भगवान परशुराम का प्रकटोत्सव प्रत्येक वर्ष बिलासपुर नगर व जिले में महोत्सव के रूप में मनाया जाता था, किन्तु इस वर्ष सामूहिक रूप से मनाया जाना संभव नही है, अतः 25 अप्रैल को भगवान परशुराम का प्रकटोत्सव सभी विप्र परिवार द्वारा अपने घर मे ही मनाएं जाने का निर्णय लिया गया है।

विप्र परिवार को छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद ने बताया, कि भगवान परशुराम (चिरंजीव) विष्णु के छठे अवतार है, उनका सम्बन्ध त्रेतायुग से है, परशुराम का शाब्दिक अर्थ फरसा लिए हुए भगवान राम है। परशुराम भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे, और शिव ने ही वरदान में उन्हें फरसा प्रदान किया था, भगवान शिव जी ने ही उन्हें युद्ध कौशल सिखाया था। फरसा रखने के कारण ही उनका नाम परशूराम था। भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि व रेणुका देवी के पुत्र थे, वे न्याय प्रिय थे, और असत्य के घोर विरोधी थे। जिसके कारण वे विप्रजनों के आराध्य भी है।

छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद का परशुराम के महोत्सव में प्रत्येक वर्ष विशेष योगदान रहा है, इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 25 अप्रैल को संध्या 7 बजे सभी विप्र परिवार को निम्न कार्य करने कहा गया है-

  1. अपने घर मे 5, 7 दीपक जलाएंगे।
  2. परशुराम जी की पूजा, अर्चना व आरती करेंगे।
  3. अपने अपने घर मे ध्वज फहराएंगे।
  4. 26 अपैल को अक्षय तृतीया मनाएंगे।
  5. अन्न सहित अन्य सामग्री दान करेंगे।
GiONews Team
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बिलासपुर– छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद के अध्यक्ष डॉ प्रदीप शुक्ला, प्रधान सचिव संजय शर्मा व कोषाध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया है, कि पंचाग पाठी विप्रजनों ने सुझाया है, कि 25 अप्रैल को प्रातः 11.45 बजे से तृतीया की तिथि है, जो 26 अप्रैल के प्रातः 11.45 तक है, भगवान परशुराम तृतीया तिथि को ही प्रकट हुए थे, अतः उनकी जयंती व प्रकटोत्सव 25 अप्रैल को प्रातः 11.45 बजे के बाद से ही मनाया जा सकता है।

अक्षय तृतीया की तिथि को दान, पुण्य का महत्व होता है, अतः उदयकाल तिथि के आधार 26 अप्रैल को प्रातः 12.45 बजे तक ही पुण्य फल की प्राप्ति होगी।

25 अप्रैल को प्रदोष काल संध्या में है, किन्तु तृतीया तिथि प्रातः 11.45 बजे से प्रारम्भ है, अतः प्रदोष काल मे भी दीप जलाकर पूजा अर्चना, प्रसाद, महाआरती किया जा सकता है, अतः समस्त विप्रजन 25 अप्रैल को ही भगवान परशुराम जी की पूजा, आरती करेंगे।

भगवान परशुराम का प्रकटोत्सव प्रत्येक वर्ष बिलासपुर नगर व जिले में महोत्सव के रूप में मनाया जाता था, किन्तु इस वर्ष सामूहिक रूप से मनाया जाना संभव नही है, अतः 25 अप्रैल को भगवान परशुराम का प्रकटोत्सव सभी विप्र परिवार द्वारा अपने घर मे ही मनाएं जाने का निर्णय लिया गया है।

विप्र परिवार को छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद ने बताया, कि भगवान परशुराम (चिरंजीव) विष्णु के छठे अवतार है, उनका सम्बन्ध त्रेतायुग से है, परशुराम का शाब्दिक अर्थ फरसा लिए हुए भगवान राम है। परशुराम भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे, और शिव ने ही वरदान में उन्हें फरसा प्रदान किया था, भगवान शिव जी ने ही उन्हें युद्ध कौशल सिखाया था। फरसा रखने के कारण ही उनका नाम परशूराम था। भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि व रेणुका देवी के पुत्र थे, वे न्याय प्रिय थे, और असत्य के घोर विरोधी थे। जिसके कारण वे विप्रजनों के आराध्य भी है।

छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद का परशुराम के महोत्सव में प्रत्येक वर्ष विशेष योगदान रहा है, इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 25 अप्रैल को संध्या 7 बजे सभी विप्र परिवार को निम्न कार्य करने कहा गया है-

  1. अपने घर मे 5, 7 दीपक जलाएंगे।
  2. परशुराम जी की पूजा, अर्चना व आरती करेंगे।
  3. अपने अपने घर मे ध्वज फहराएंगे।
  4. 26 अपैल को अक्षय तृतीया मनाएंगे।
  5. अन्न सहित अन्य सामग्री दान करेंगे।