Thursday, October 6, 2022

कानन में फिर एक मौत , महीने भर में यह दूसरी मौत…….

बिलासपुर। कानन पेंडारी में एक भालू की शनिवार शाम निमोनिया से मौत हो गई। भालू को दो दिन पहले तबीयत खराब होने पर कानन जू के केज से शिफ्ट कर अस्पताल ले जाया गया था। शनिवार देर शाम उसकी मौत हो गई। मौत का कारण निमोनिया बताया जा रहा है।

बिलासपुर के कानन जू में लगातार जंगली जानवरों की मौत हो रही है। महीनेभर में यह दूसरी बार जंगली जानवर की मौत हुई है। कुछ दिनों पहले हिप्पोपोटामस की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, अब शनिवार की शाम भालू की निमोनिया से मौत हो गई । कानन जू वन विभाग के नियंत्रण में है। यहां वन विभाग के ही अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। कानन जू में हो रही लगातार मौत ने यह साबित कर दिया है कि वन विभाग को जू के बेशकीमती जंगली जानवरों की चिंता नहीं है। जंगली जानवरों की तबीयत खराब होने घायल होने या किसी तरह की बीमारी हो जाने पर उन्हें बचा पाने में प्रबंधन असफल रहते हैं।

बिलासपुर कानन पेंडारी में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की कमी नजर आ रही है

कानन जू में वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट की कमी साफ देखी जा रही है। जानवरों के व्यवहार और उनके गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट बेहतर सुझाव देते हैं, वे जानवरों के व्यवहार से जान जाते हैं कि उनका स्वास्थ्य खराब है या नहीं, लेकिन कानन जू में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट नहीं है। इसलिए यहां के कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं होती है कि उनकी तबीयत और सुधार किस तरह से किया जाता है, कानन जू में वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट नहीं होने की वजह से कानन जू जंगली जानवरों का कब्रगाह बनता जा रहा है।

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बिलासपुर। कानन पेंडारी में एक भालू की शनिवार शाम निमोनिया से मौत हो गई। भालू को दो दिन पहले तबीयत खराब होने पर कानन जू के केज से शिफ्ट कर अस्पताल ले जाया गया था। शनिवार देर शाम उसकी मौत हो गई। मौत का कारण निमोनिया बताया जा रहा है।

बिलासपुर के कानन जू में लगातार जंगली जानवरों की मौत हो रही है। महीनेभर में यह दूसरी बार जंगली जानवर की मौत हुई है। कुछ दिनों पहले हिप्पोपोटामस की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, अब शनिवार की शाम भालू की निमोनिया से मौत हो गई । कानन जू वन विभाग के नियंत्रण में है। यहां वन विभाग के ही अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। कानन जू में हो रही लगातार मौत ने यह साबित कर दिया है कि वन विभाग को जू के बेशकीमती जंगली जानवरों की चिंता नहीं है। जंगली जानवरों की तबीयत खराब होने घायल होने या किसी तरह की बीमारी हो जाने पर उन्हें बचा पाने में प्रबंधन असफल रहते हैं।

बिलासपुर कानन पेंडारी में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की कमी नजर आ रही है

कानन जू में वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट की कमी साफ देखी जा रही है। जानवरों के व्यवहार और उनके गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट बेहतर सुझाव देते हैं, वे जानवरों के व्यवहार से जान जाते हैं कि उनका स्वास्थ्य खराब है या नहीं, लेकिन कानन जू में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट नहीं है। इसलिए यहां के कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं होती है कि उनकी तबीयत और सुधार किस तरह से किया जाता है, कानन जू में वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट नहीं होने की वजह से कानन जू जंगली जानवरों का कब्रगाह बनता जा रहा है।