Monday, September 26, 2022

कोरोना तीसरी लहर : कोरोना बच्चों को लगातार कर रहा संक्रमित, 14 दिन में 300 बच्चे चपेट में..

बिलासपुर – कोरोना की तीसरी लहर लगातार बच्चों को संक्रमित कर रही है। स्थिति यह है कि 14 दिन के भीतर 300 से अधिक बच्चे कोरोना की चपेट में आ गए हैं। राहत है कि कोरोनावायरस के शिकार ज्यादातर बच्चे घर में ही आइसोलेट हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है। इधर, सरकारी अस्पताल में पिछले एक माह से सिर्फ तैयारियों का दावा किया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आए तो बच्चों के लिए मात्र 16 वेंटिलेटर बेड है। ऐसे में स्थिति गंभीर हुई तो मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों पर ही भरोसा करना पड़ सकता है।

कोरोना की तीसरी लहर चल रही है और लगातार संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिंता इसलिए है क्योंकि कोरोना का नया वैरिएंट इस बार बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। इस बार संक्रमण परिवार के ज्यादातर सदस्यों को अपना शिकार बना रहा है। ऐसे में घर के एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं, तो उनके अन्य सदस्य भी संक्रमित होने लगे हैं। ऐसे में तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही बच्चों के डॉक्टर इस वैरिएंट को लेकर हैरान व परेशान हैं। यही वजह है कि बच्चों के बीमार होने पर उनका कोरोना जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

जनवरी 2022 के शुरुआत में ही लगातार बच्चे संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। अब तक संक्रमित बच्चों की संख्या 300 के पार हो गई है। मौजूदा हालात में रोज 25 से 30 बच्चे कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं। हालांकि, अधिकांश बच्चों का घरों में इलाज चल रहा है और अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है। भले ही स्वास्थ्य विभाग के अफसर बच्चों के लिए अस्पताल व बेड की तैयारी करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, उपचार की व्यवस्था अधूरी है।

CIMS (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) में 42 बिस्तर बच्चों के लिए रखा गया है। जिसमें मात्र 16 वेंटिलेटर बेड हैं और बाकी ऑक्सीजन बेड हैं। इसी तरह संभागीय कोविड अस्पताल में भी बच्चों को रखने के लिए 42 बिस्तर तैयार किया गया है। जिसमें मात्र 10 वेंटिलेटर हैं। बाकी ऑक्सीजन बेड हैं। आने वाले दिनों में कोरोना का ग्राफ बढ़ा और बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति बनी तो हालात बदतर हो सकते हैं।

CMHO डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर अलर्ट जारी किया है। जिले के 37 निजी अस्पतालों में 153 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। सरकारी अस्पतालों में 1667 बिस्तर भी व्यवस्था किया गया है। बच्चों के लिए सभी अस्पतालों में वार्ड बनाने के लिए कहा गया है।

बच्चों के डॉक्टर के बताते हैं कि बढ़ते कोरोना संक्रमण और मौसम के बदलते मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना सर्दी, खासी और बुखार से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि वर्तमान में 25 फीसदी बच्चे कोरोना संक्रमण के शिकार हैं। हालांकि, संक्रमित बच्चों के पैरेंट्स टेस्टिंग कराने के लिए रूचि नहीं ले रहे हैं। क्लीनिक में आने वाले 25-30 बच्चों में कोरोना के लक्षण मिल रहे हैं। लेकिन, सलाह के बाद भी 5 फीसदी पैरेंट्स ही टेस्ट करा रहे हैं। उन्होंने कोरोना के लक्षण वाले अधिक से अधिक बच्चों की जांच कराने की सलाह दी है।

डॉक्टर बताते हैं कि आजकल ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों के एंटीबायोटिक व बुखार की दवाइयां घर में ही रखते हैं और बिना डॉक्टर के सलाह लिए ये दवाइंयां बच्चों को दे देते हैं। यह स्थिति बच्चों के लिए घातक हो सकती है। मौजूदा हालात में बच्चों के बीमार होने पर उसे तत्काल अस्पताल लेकर जांए और जरूरी जांच कराने के बाद डॉक्टर की सलाह पर दवाइंयां बच्चों को खिलाएं।

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बिलासपुर – कोरोना की तीसरी लहर लगातार बच्चों को संक्रमित कर रही है। स्थिति यह है कि 14 दिन के भीतर 300 से अधिक बच्चे कोरोना की चपेट में आ गए हैं। राहत है कि कोरोनावायरस के शिकार ज्यादातर बच्चे घर में ही आइसोलेट हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है। इधर, सरकारी अस्पताल में पिछले एक माह से सिर्फ तैयारियों का दावा किया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आए तो बच्चों के लिए मात्र 16 वेंटिलेटर बेड है। ऐसे में स्थिति गंभीर हुई तो मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों पर ही भरोसा करना पड़ सकता है।

कोरोना की तीसरी लहर चल रही है और लगातार संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिंता इसलिए है क्योंकि कोरोना का नया वैरिएंट इस बार बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। इस बार संक्रमण परिवार के ज्यादातर सदस्यों को अपना शिकार बना रहा है। ऐसे में घर के एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं, तो उनके अन्य सदस्य भी संक्रमित होने लगे हैं। ऐसे में तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही बच्चों के डॉक्टर इस वैरिएंट को लेकर हैरान व परेशान हैं। यही वजह है कि बच्चों के बीमार होने पर उनका कोरोना जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

जनवरी 2022 के शुरुआत में ही लगातार बच्चे संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। अब तक संक्रमित बच्चों की संख्या 300 के पार हो गई है। मौजूदा हालात में रोज 25 से 30 बच्चे कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं। हालांकि, अधिकांश बच्चों का घरों में इलाज चल रहा है और अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है। भले ही स्वास्थ्य विभाग के अफसर बच्चों के लिए अस्पताल व बेड की तैयारी करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, उपचार की व्यवस्था अधूरी है।

CIMS (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) में 42 बिस्तर बच्चों के लिए रखा गया है। जिसमें मात्र 16 वेंटिलेटर बेड हैं और बाकी ऑक्सीजन बेड हैं। इसी तरह संभागीय कोविड अस्पताल में भी बच्चों को रखने के लिए 42 बिस्तर तैयार किया गया है। जिसमें मात्र 10 वेंटिलेटर हैं। बाकी ऑक्सीजन बेड हैं। आने वाले दिनों में कोरोना का ग्राफ बढ़ा और बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति बनी तो हालात बदतर हो सकते हैं।

CMHO डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर अलर्ट जारी किया है। जिले के 37 निजी अस्पतालों में 153 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। सरकारी अस्पतालों में 1667 बिस्तर भी व्यवस्था किया गया है। बच्चों के लिए सभी अस्पतालों में वार्ड बनाने के लिए कहा गया है।

बच्चों के डॉक्टर के बताते हैं कि बढ़ते कोरोना संक्रमण और मौसम के बदलते मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना सर्दी, खासी और बुखार से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि वर्तमान में 25 फीसदी बच्चे कोरोना संक्रमण के शिकार हैं। हालांकि, संक्रमित बच्चों के पैरेंट्स टेस्टिंग कराने के लिए रूचि नहीं ले रहे हैं। क्लीनिक में आने वाले 25-30 बच्चों में कोरोना के लक्षण मिल रहे हैं। लेकिन, सलाह के बाद भी 5 फीसदी पैरेंट्स ही टेस्ट करा रहे हैं। उन्होंने कोरोना के लक्षण वाले अधिक से अधिक बच्चों की जांच कराने की सलाह दी है।

डॉक्टर बताते हैं कि आजकल ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों के एंटीबायोटिक व बुखार की दवाइयां घर में ही रखते हैं और बिना डॉक्टर के सलाह लिए ये दवाइंयां बच्चों को दे देते हैं। यह स्थिति बच्चों के लिए घातक हो सकती है। मौजूदा हालात में बच्चों के बीमार होने पर उसे तत्काल अस्पताल लेकर जांए और जरूरी जांच कराने के बाद डॉक्टर की सलाह पर दवाइंयां बच्चों को खिलाएं।