Saturday, December 3, 2022

चुनाव रिऐक्शन : 5 राज्यों के चुनाव नतीजों से निकलीं 5 बड़ी बातें…

5 चुनावी राज्यों में से बीजेपी ने 4 में सत्ता बरकरार रखी है। यहां तक कि उन राज्यों में जहां सत्ता विरोधी लहर बताई जा रही थी, उनमें भी जीत दर्ज कर बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया है। 5 बड़ी बातें जो अहम दिखाई दे रही है।

1. किसान मुद्दा बेअसर निकला….

पांच राज्यों के चुनाव के मद्देनजर किसान आंदोलन को सबसे ज्यादा निर्णायक माना जा रहा था, लेकिन यह मुद्दा बेअसर साबित हुआ। किसान बेल्ट कहे जाने वाले वेस्ट यूपी में बीजेपी को सबसे कमजोर आंका जा रहा था, लेकिन बीजेपी ने इस इलाके में बड़ी जीत दर्ज की है। पंजाब में बीजेपी को कभी भी सत्ता की रेस में नहीं माना गया, लेकिन किसान आंदोलन से जुड़े जिन नेताओं ने पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा, वह भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए।

2. कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी…..

आप की पंजाब में जीत कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। जिन राज्यों में अब तक बीजेपी और कांग्रेस सीधी लड़ाई में दिखती रही है, वहां पर आप कांग्रेस के विकल्प के रूप में उभर रही है। दिल्ली के बाद पंजाब में जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से सत्ता छीनी है, उसके जरिए कई दूसरे राज्यों में भी सियासी जमीन तैयार होने की संभावना बढ़ गई है। कांग्रेस के लिए बचे राज्यों में असर बनाए रखना चुनौती होगी।

3. अखिलेश की कोशिश फेल……

यूपी में अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, पल्लवी पटेल को साथ लेकर नॉन यादव ओबीसी को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। यह कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई। समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोट बैंक यादव + मुसलमान के मुकाबले नॉन यादव ओबीसी बीजेपी के साथ ही गोलबंद रहा। कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित अनुसूचित जाति वर्ग का एक बड़ा हिस्सा भी बीएसपी से निकलकर बीजेपी साथ आ गया। बीएसपी को अब अपने अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ना होगा।

4. मोदी के आगे कोई फैक्टर नहीं……

मोदी की लोकप्रियता अभी भी शिखर पर है। उनके आते ही बीजेपी के खिलाफ दिखने वाले तमाम फैक्टर बेअसर हो जाते हैं। यूपी में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के जरिए योगी आदित्यनाथ भी लोकप्रियता के पायदान पर दूसरे नंबर पर माने जाने लगे हैं। भविष्य में मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में योगी के नाम की चर्चा शुरू हो गई है। कई फैसलों पर योगी के बढ़े कद का असर भी दिख सकता है।

5. वोट का आधार नहीं बने मुद्दे…..

महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे मतदाताओं का ध्यान तो खींचते हैं लेकिन वोट का आधार नहीं बनते। 2014 से ‘राष्ट्रवाद’ की जो अवधारणा विकसित हुई, वह और मजबूत हुई है। बीजेपी को इस मामले में कामयाब माना जाएगा कि वह मतदाताओं को यह समझाने में सफल रही है कि देश का मान-सम्मान और सीमाओं की सुरक्षा, यह सब मोदी के रहते ही मुमकिन है। यही वजह रही के चुनाव अभियान के दौरान कड़े मुकाबले की बात देखी गई लेकिन मतदान के दिन वह कड़ा मुकाबला कहीं दिखा नहीं।

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5 चुनावी राज्यों में से बीजेपी ने 4 में सत्ता बरकरार रखी है। यहां तक कि उन राज्यों में जहां सत्ता विरोधी लहर बताई जा रही थी, उनमें भी जीत दर्ज कर बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया है। 5 बड़ी बातें जो अहम दिखाई दे रही है।

1. किसान मुद्दा बेअसर निकला….

पांच राज्यों के चुनाव के मद्देनजर किसान आंदोलन को सबसे ज्यादा निर्णायक माना जा रहा था, लेकिन यह मुद्दा बेअसर साबित हुआ। किसान बेल्ट कहे जाने वाले वेस्ट यूपी में बीजेपी को सबसे कमजोर आंका जा रहा था, लेकिन बीजेपी ने इस इलाके में बड़ी जीत दर्ज की है। पंजाब में बीजेपी को कभी भी सत्ता की रेस में नहीं माना गया, लेकिन किसान आंदोलन से जुड़े जिन नेताओं ने पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा, वह भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए।

2. कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी…..

आप की पंजाब में जीत कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। जिन राज्यों में अब तक बीजेपी और कांग्रेस सीधी लड़ाई में दिखती रही है, वहां पर आप कांग्रेस के विकल्प के रूप में उभर रही है। दिल्ली के बाद पंजाब में जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से सत्ता छीनी है, उसके जरिए कई दूसरे राज्यों में भी सियासी जमीन तैयार होने की संभावना बढ़ गई है। कांग्रेस के लिए बचे राज्यों में असर बनाए रखना चुनौती होगी।

3. अखिलेश की कोशिश फेल……

यूपी में अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, पल्लवी पटेल को साथ लेकर नॉन यादव ओबीसी को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। यह कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई। समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोट बैंक यादव + मुसलमान के मुकाबले नॉन यादव ओबीसी बीजेपी के साथ ही गोलबंद रहा। कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित अनुसूचित जाति वर्ग का एक बड़ा हिस्सा भी बीएसपी से निकलकर बीजेपी साथ आ गया। बीएसपी को अब अपने अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ना होगा।

4. मोदी के आगे कोई फैक्टर नहीं……

मोदी की लोकप्रियता अभी भी शिखर पर है। उनके आते ही बीजेपी के खिलाफ दिखने वाले तमाम फैक्टर बेअसर हो जाते हैं। यूपी में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के जरिए योगी आदित्यनाथ भी लोकप्रियता के पायदान पर दूसरे नंबर पर माने जाने लगे हैं। भविष्य में मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में योगी के नाम की चर्चा शुरू हो गई है। कई फैसलों पर योगी के बढ़े कद का असर भी दिख सकता है।

5. वोट का आधार नहीं बने मुद्दे…..

महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे मतदाताओं का ध्यान तो खींचते हैं लेकिन वोट का आधार नहीं बनते। 2014 से ‘राष्ट्रवाद’ की जो अवधारणा विकसित हुई, वह और मजबूत हुई है। बीजेपी को इस मामले में कामयाब माना जाएगा कि वह मतदाताओं को यह समझाने में सफल रही है कि देश का मान-सम्मान और सीमाओं की सुरक्षा, यह सब मोदी के रहते ही मुमकिन है। यही वजह रही के चुनाव अभियान के दौरान कड़े मुकाबले की बात देखी गई लेकिन मतदान के दिन वह कड़ा मुकाबला कहीं दिखा नहीं।