Monday, September 26, 2022

हनुमान जयंती विशेष-रतनपुर में इकलौता मंदिर जहाँ हनुमान जयंती पर देवी के रूप में पूजे गए बजरंग बली…… रामायण काल से जुड़ी है मान्यता ।

बिलासपुर। पूरे देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है जहां बजरंग बली को स्त्री रूप में पूजा जाता है। ये मंदिर बिलासपुर जिले के रतनपुर के गिरजाबंध में है। हनुमान जंयती के दिन शनिवार को यहां दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा। लोगों ने यहां आकर स्त्री रूप में विराजे हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन किए। सुबह यहां से भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। बीते दो सालों से हनुमान जयंती पर यहां कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हो सका था।

इस बार यहां रौनक लौटी, बिलासपुर और आस-पास से करीब 10 हजार से अधिक लोग दिन भर यहां दर्शन को पहुंचते रहेे। मंदिर में सुंदरकांड और भजन पाठ का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। हवन में भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु बड़ी तादाद में शामिल हुए।

मूर्ति की स्थापना से जुड़ी मान्यता
यहां हनुमान जी के नारी रूप में पूजे जाने के पीछे एक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार, 10वीं शताब्दी के काल में रतनपुर के एक राजा पृथ्वी देवजू थे जो हनुमान जी के भक्त थे। राजा को एक बार कुष्ट रोग हो गया। इससे राजा जीवन से निराश हो चुके थे। एक रात हनुमान जी राजा के सपने में आए और मंदिर बनवाने के लिए कहा। मंदिर बनने के बाद हनुमान जी फिर से राजा के सपने में आए और अपनी प्रतिमा को रतनपुर में ही स्थित महामाया कुण्ड से निकालकर मंदिर में स्थापित करने को कहा।

राजा ने वहां से प्रतिमा निकलवाई यह प्रतिमा नारी रूप में थी। जिसे राजा ने भगवान के आदेश के अनुसार मंदिर में स्थापना कराया। तभी से इसकी पूजा हो रही है। मंदिर बनवाने के बाद राजा रोग मुक्त हो गया और राजा की दूसरी इच्छा को पूरी करने के लिए हनुमान जी सालों से लोगों की मनोकामना पूरी करते आ रहे हैं।

नारी रूप में पूजे जाने का रहस्य
मुख्य पुजारी तारकेश्वर महराज बताते हैं कि ये प्रतिमा किसने बनवाई इसका कोई प्रमाण नहीं है। बुजुर्गों से हमने सुना है कि रामायण काल में भगवान बजरंग बली के एक रूप का जिक्र मिलता है, उसी देवी रूप में ये प्रमिता मिली और तब से पूजा हो रही है। दरअसल राम-रावण युद्ध के समय जब रावण के भाई पाताल लोक का नरेश अहिरावण छल से राम-लक्ष्मण को बंदी बना लिया तब उन्हें छुड़ाने हनुमान पाताल लोक में गए। अहिरावण की आराध्य देवी कामदा देवी की मूर्ति में प्रवेश कर हनुमान ने अहिरावण का वध किया। यहां हनुमान के उसी रूप की पूजा होती है।

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बिलासपुर। पूरे देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है जहां बजरंग बली को स्त्री रूप में पूजा जाता है। ये मंदिर बिलासपुर जिले के रतनपुर के गिरजाबंध में है। हनुमान जंयती के दिन शनिवार को यहां दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा। लोगों ने यहां आकर स्त्री रूप में विराजे हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन किए। सुबह यहां से भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। बीते दो सालों से हनुमान जयंती पर यहां कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हो सका था।

इस बार यहां रौनक लौटी, बिलासपुर और आस-पास से करीब 10 हजार से अधिक लोग दिन भर यहां दर्शन को पहुंचते रहेे। मंदिर में सुंदरकांड और भजन पाठ का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। हवन में भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु बड़ी तादाद में शामिल हुए।

मूर्ति की स्थापना से जुड़ी मान्यता
यहां हनुमान जी के नारी रूप में पूजे जाने के पीछे एक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार, 10वीं शताब्दी के काल में रतनपुर के एक राजा पृथ्वी देवजू थे जो हनुमान जी के भक्त थे। राजा को एक बार कुष्ट रोग हो गया। इससे राजा जीवन से निराश हो चुके थे। एक रात हनुमान जी राजा के सपने में आए और मंदिर बनवाने के लिए कहा। मंदिर बनने के बाद हनुमान जी फिर से राजा के सपने में आए और अपनी प्रतिमा को रतनपुर में ही स्थित महामाया कुण्ड से निकालकर मंदिर में स्थापित करने को कहा।

राजा ने वहां से प्रतिमा निकलवाई यह प्रतिमा नारी रूप में थी। जिसे राजा ने भगवान के आदेश के अनुसार मंदिर में स्थापना कराया। तभी से इसकी पूजा हो रही है। मंदिर बनवाने के बाद राजा रोग मुक्त हो गया और राजा की दूसरी इच्छा को पूरी करने के लिए हनुमान जी सालों से लोगों की मनोकामना पूरी करते आ रहे हैं।

नारी रूप में पूजे जाने का रहस्य
मुख्य पुजारी तारकेश्वर महराज बताते हैं कि ये प्रतिमा किसने बनवाई इसका कोई प्रमाण नहीं है। बुजुर्गों से हमने सुना है कि रामायण काल में भगवान बजरंग बली के एक रूप का जिक्र मिलता है, उसी देवी रूप में ये प्रमिता मिली और तब से पूजा हो रही है। दरअसल राम-रावण युद्ध के समय जब रावण के भाई पाताल लोक का नरेश अहिरावण छल से राम-लक्ष्मण को बंदी बना लिया तब उन्हें छुड़ाने हनुमान पाताल लोक में गए। अहिरावण की आराध्य देवी कामदा देवी की मूर्ति में प्रवेश कर हनुमान ने अहिरावण का वध किया। यहां हनुमान के उसी रूप की पूजा होती है।