Thursday, October 6, 2022

लापता…..सीआरपीएफ जवान 8 साल से है लापता…. पत्नी ने लिखा- मृत्यु प्रमाण-पत्र ही दे दीजिए।

बिलासपुर। सीआरपीएफ असम का जवान पिछले 8 साल से लापता है। इस अवधि में पुलिस उन्हें नहीं ढूंढ सकी। आज भी लौटने की उम्मीदें बांधे परिवार ने थक-हारकर मृत्यु प्रमाण-पत्र मांगा, ताकि पेंशन आदि मिल सके। लेकिन पुलिस यह भी नहीं दे रही। जशपुर के जगदीश राम की नौकरी 20 साल पहले सीआरपीएफ में लगी थी।

असम के तिनसुकिया में पोस्टिंग मिली। उनका परिवार बिलासपुर के सरकंडा में रह रहा था। 8 साल पहले वे छुट्टियां मनाने बिलासपुर आए। 15 दिनों की छुट्टी के बाद असम लौट रहे थे। कोलकाता से असम जाने के दौरान वे लापता हो गए। इसके बाद से आज तक परिवार से संपर्क नहीं हो सका है।

परिवार के लोगों को नहीं पता कि पिछले 8 सालों से वे कहां हैं। किस हाल में हैं। इधर, लगातार गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने और लगातार गुजारिश के बाद भी पुलिस उन्हें नहीं ढूंढ सकी। नो ट्रेस सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण पत्नी-बच्चों को किसी तरह की मदद भी नहीं मिल पा रही।

वहीं, तत्कालीन एसडीएम पुलक भट्‌टाचार्य ने सर्टिफिकेट के लिए कोर्ट जाने की सलाह दी है। आर्थिक परेशानियों से जूझ रही जवान की पत्नी ने अब मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया है। जगदीश राम नीरज की पत्नी गायत्री नीरज जोरापारा सरकंडा में रह रहीं हैं।

वे बताती हैं वर्ष 1992 से जगदीश की पोस्टिंग असम के तिनसुकिया में बतौर हवलदार थी। वे 1997 में शादी के बाद से पति के साथ रह रही थीं। वर्ष 2014 के अगस्त महीने में पति छुट्टियां मनाने असम से बिलासपुर आए। लगभग 15 दिन की छुट्टी मनाने के बाद वे फिर असम जाने के लिए घर से निकले। उन्होंने गीतांजलि एक्सप्रेस से कोलकाता का टिकट करवाया।

कोलकाता से असम के लिए ट्रेन बदलनी थी। गायत्री बताती हैं कि कोलकाता पहुंचने के बाद से पति से संपर्क नहीं हुआ। उन्होंने काफी प्रयास किया, लेकिन अब तक उनका पता नहीं चल सका है। सीआरपीएफ असम के अधिकारियों से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि जगदीश छुट्टी के बाद ड्यूटी पर नहीं लौटे। आज तक उनका पता नहीं चल सका है।

मां के सिर पर दो बड़े बच्चों का बोझ
गायत्री के दो बच्चे हैं। 20 साल का निलेश और उससे छोटा हितेश। आर्थिक परेशानियों के कारण उन्होंने सरकंडा में जोरापारा का मकान छोड़ दिया है और जशपुर में रहने लगे हैं, लेकिन बिलासपुर में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने के कारण पुलिस से पति की खोजबीन करने की गुजारिश करने हर बार उन्हें यहां आना पड़ता है।

उन्होंने पति जगदीश की पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य सुविधाओं के लिए आवेदन किया है। असम के सीआरपीएफ अधिकारी बिलासपुर पुलिस का नॉट ट्रेस आउट सर्टिफिकेट मांग रहे हैं, इस वजह से सारी प्रक्रियाएं रुकी हैं। इधर, परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

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बिलासपुर। सीआरपीएफ असम का जवान पिछले 8 साल से लापता है। इस अवधि में पुलिस उन्हें नहीं ढूंढ सकी। आज भी लौटने की उम्मीदें बांधे परिवार ने थक-हारकर मृत्यु प्रमाण-पत्र मांगा, ताकि पेंशन आदि मिल सके। लेकिन पुलिस यह भी नहीं दे रही। जशपुर के जगदीश राम की नौकरी 20 साल पहले सीआरपीएफ में लगी थी।

असम के तिनसुकिया में पोस्टिंग मिली। उनका परिवार बिलासपुर के सरकंडा में रह रहा था। 8 साल पहले वे छुट्टियां मनाने बिलासपुर आए। 15 दिनों की छुट्टी के बाद असम लौट रहे थे। कोलकाता से असम जाने के दौरान वे लापता हो गए। इसके बाद से आज तक परिवार से संपर्क नहीं हो सका है।

परिवार के लोगों को नहीं पता कि पिछले 8 सालों से वे कहां हैं। किस हाल में हैं। इधर, लगातार गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने और लगातार गुजारिश के बाद भी पुलिस उन्हें नहीं ढूंढ सकी। नो ट्रेस सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण पत्नी-बच्चों को किसी तरह की मदद भी नहीं मिल पा रही।

वहीं, तत्कालीन एसडीएम पुलक भट्‌टाचार्य ने सर्टिफिकेट के लिए कोर्ट जाने की सलाह दी है। आर्थिक परेशानियों से जूझ रही जवान की पत्नी ने अब मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया है। जगदीश राम नीरज की पत्नी गायत्री नीरज जोरापारा सरकंडा में रह रहीं हैं।

वे बताती हैं वर्ष 1992 से जगदीश की पोस्टिंग असम के तिनसुकिया में बतौर हवलदार थी। वे 1997 में शादी के बाद से पति के साथ रह रही थीं। वर्ष 2014 के अगस्त महीने में पति छुट्टियां मनाने असम से बिलासपुर आए। लगभग 15 दिन की छुट्टी मनाने के बाद वे फिर असम जाने के लिए घर से निकले। उन्होंने गीतांजलि एक्सप्रेस से कोलकाता का टिकट करवाया।

कोलकाता से असम के लिए ट्रेन बदलनी थी। गायत्री बताती हैं कि कोलकाता पहुंचने के बाद से पति से संपर्क नहीं हुआ। उन्होंने काफी प्रयास किया, लेकिन अब तक उनका पता नहीं चल सका है। सीआरपीएफ असम के अधिकारियों से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि जगदीश छुट्टी के बाद ड्यूटी पर नहीं लौटे। आज तक उनका पता नहीं चल सका है।

मां के सिर पर दो बड़े बच्चों का बोझ
गायत्री के दो बच्चे हैं। 20 साल का निलेश और उससे छोटा हितेश। आर्थिक परेशानियों के कारण उन्होंने सरकंडा में जोरापारा का मकान छोड़ दिया है और जशपुर में रहने लगे हैं, लेकिन बिलासपुर में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने के कारण पुलिस से पति की खोजबीन करने की गुजारिश करने हर बार उन्हें यहां आना पड़ता है।

उन्होंने पति जगदीश की पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य सुविधाओं के लिए आवेदन किया है। असम के सीआरपीएफ अधिकारी बिलासपुर पुलिस का नॉट ट्रेस आउट सर्टिफिकेट मांग रहे हैं, इस वजह से सारी प्रक्रियाएं रुकी हैं। इधर, परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।