Monday, September 26, 2022

रुपाली महतारी संस्था की शांता ने “तीजा” पर महिलाओं को बांटी साड़ियां

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ की बहन बेटियों के लिए तीजा सबसे बड़ा त्यौहार है, फिर चाहे 18 साल की नवविवाहिता हो, या 88 साल की उम्रदराज दादी.. जब तक मायके में पिता भाई भतीजे है उन्हें तीजा के लिए लेने वे जरूर आते हैं, तीजा लेने, का सिलसिला यू तो पोला के पहले शुरू हो जाता है लेकिन करूं भात , के दिन यानी तीजा, के 1 दिन पहले बेटियां अपने मायके पहुंच ही जाती हैं, पर ऐसी कई सुहागिनी भी है इन्हें तीजा लेने कोई नहीं आता क्योंकि ना तो उनका मायका है और ना ही मायके सा दुलार देने वाला परिवार ऐसी बेटी बहन के लिए मायका का प्यार , दुलार लुटाती, है अध्यक्ष श्री शांता शर्मा जी उन्हे तीजा का लुगरा उपहार में लुगरा को पहाड़ में एक घर यह अहसास कराती है कि यह एहसास कराती है कि वे भी मायके का लुगरा पहन कर तीजा का व्रत करेगी।
रुपाली महतारी गुड़ी बहुउद्देशीय संस्था भिलाई द्वारा जिला बिलासपुर अटल आवास निर्धन महिलाओं को बांटा गया। जिनको तीजा लेने के लिए कोई लेने वाले नहीं है। लगातार 6 वर्षों से 11महिलाओ का संस्था अलग-अलग जगह में यह कार्यक्रम का आयोजन करते आ रही है यह आयोजन को सफल बनाने के लिए, विशेष अतिथि बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष के कर कमलों से यह आयोजन प्रारंभ हुआ। वही समाज सेवियों का सम्मान के लिए विशिष्ट अतिथि के स्वरूप डॉ सुरभि राजगीर जी,बी. एच. एम .एस., पी.जी. डी .सी .सी., न्यूट्रिशनिस्ट, , मनोचिकित्सक, उपस्थित रहे। संस्था ने इनके दोनों की सेवा भाव को देखते हुए, छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहनों से सम्मान किया तथा समाज में श्रेष्ठ कार्य करने वाली महिलाओं को अभी सम्मान किया गया, संस्था संरक्षक डॉ अलका यतीन यादव, प्रिंस वर्मा, अभिषेक ठाकुर, अरुणिमा, गोविंदा मौके पर उपस्थित रहे एवं इस आयोजन को सफल बनाने में विशेष भागीदारी सराहनीय रही। संस्था अध्यक्ष सुश्री शांता शर्मा द्वारा सभी उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद कर, पोरा तीजा की हार्दिक शुभकामनाएं दी। अध्यक्ष सुश्री शांता शर्मा द्वारा कई वर्षों से छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्यौहार व्यंजन एवं रुको सहेजने के साथ छत्तीसगढ़ का प्रदेश भर मे ** भ्रमण कर नशा मुक्त छत्तीसगढ़, कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ ,संस्कृति पुर्ण छत्तीसगढ़ के उद्देश्यों को लोगों तक जागरूक करती आ रही हैं

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बिलासपुर– छत्तीसगढ़ की बहन बेटियों के लिए तीजा सबसे बड़ा त्यौहार है, फिर चाहे 18 साल की नवविवाहिता हो, या 88 साल की उम्रदराज दादी.. जब तक मायके में पिता भाई भतीजे है उन्हें तीजा के लिए लेने वे जरूर आते हैं, तीजा लेने, का सिलसिला यू तो पोला के पहले शुरू हो जाता है लेकिन करूं भात , के दिन यानी तीजा, के 1 दिन पहले बेटियां अपने मायके पहुंच ही जाती हैं, पर ऐसी कई सुहागिनी भी है इन्हें तीजा लेने कोई नहीं आता क्योंकि ना तो उनका मायका है और ना ही मायके सा दुलार देने वाला परिवार ऐसी बेटी बहन के लिए मायका का प्यार , दुलार लुटाती, है अध्यक्ष श्री शांता शर्मा जी उन्हे तीजा का लुगरा उपहार में लुगरा को पहाड़ में एक घर यह अहसास कराती है कि यह एहसास कराती है कि वे भी मायके का लुगरा पहन कर तीजा का व्रत करेगी।
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