Saturday, December 3, 2022

मेरे.. राम !!

स्पेशल स्टोरी- टीवी पर रामायण देखकर मेरे 5 वर्षीय बेटे विजित ने राम बनने की ठानी.. परिवार को खुशी हुई.. क्योंकि आज बच्चे राम नहीं.. कृष्ण बनना चाहते हैं.. ऐसे में आज के दौर में मर्यादा पुरुषोत्तम जैसा बनने की सोचना.. उनके चरित्र को खुद में समाहित करने जैसा है।

लॉकडाउन के दौरान इन दिनों दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत का प्रसारण किया जा रहा है, परिवार के सभी लोग एक साथ बैठकर टीवी पर इन दोनों सीरियल को देख बीते जमाने की यादें ताज़ा कर रहे हैं। स्वाभाविक है.. बच्चे भी भगवान राम और कृष्ण के चरित्र से प्रभावित होंगे ही.. ऐसे समय बाल लीला करते.. माखन खाते कृष्ण.. की जगह विजित ने वन में विचरण कर रहे राम बनने की ठानी.. परिवार के लोगों को खुशी हुई.. धनुष बाण बनाया गया.. फिर राम के परिधान में सजकर उनके पदचिन्हों पर चलने की सीख के साथ उसने आगे बढ़ना शुरू किया.. संयोग भी ऐसा बना, कि विजित जब राम की वेशभूषा में तैयार हुआ, उस वक्त महाभारत सिरियल चल रहा था..

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और 16 कलाओं में निपुण भगवान कृष्ण का अवतार पृथ्वी पर इसलिए हुआ, कि लोग उनके जीवन चरित्र से सीख लेकर अपने जीवन में सफल बनाएं।

मोबाइल युग से पहले प्रदेश में रामलीला, कृष्णलीला और रहस का प्रचलन था, गांव-गांव में इनका आयोजन हुआ करता था, लोग भगवान राम, कृष्ण के जीवन चरित्र से सीख लेते और वैसा ही जीवन जीने की कोशिश करते थे.. लेकिन समय के साथ उनकी जगह टीवी सीरियल और मोबाइल एप्स ने ले लिया। अब ज़माना टिकटॉक का है।

हम सब एक-दूसरे से भगवान राम जैसा चरित्र की आशा करते हैं, लिहाजा जरूरत इस बात की है, कि हम इसकी शुरुआत खुद से करें.. भले आज के हालात में राम बनना.. राम जैसा होना कठिन सा लगता हो.. पर मर्यादाओं में बंधकर जीना आपके जीवन को सफल ज़रूर बना देगा..

GiONews Team
Editor In Chief

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स्पेशल स्टोरी- टीवी पर रामायण देखकर मेरे 5 वर्षीय बेटे विजित ने राम बनने की ठानी.. परिवार को खुशी हुई.. क्योंकि आज बच्चे राम नहीं.. कृष्ण बनना चाहते हैं.. ऐसे में आज के दौर में मर्यादा पुरुषोत्तम जैसा बनने की सोचना.. उनके चरित्र को खुद में समाहित करने जैसा है।

लॉकडाउन के दौरान इन दिनों दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत का प्रसारण किया जा रहा है, परिवार के सभी लोग एक साथ बैठकर टीवी पर इन दोनों सीरियल को देख बीते जमाने की यादें ताज़ा कर रहे हैं। स्वाभाविक है.. बच्चे भी भगवान राम और कृष्ण के चरित्र से प्रभावित होंगे ही.. ऐसे समय बाल लीला करते.. माखन खाते कृष्ण.. की जगह विजित ने वन में विचरण कर रहे राम बनने की ठानी.. परिवार के लोगों को खुशी हुई.. धनुष बाण बनाया गया.. फिर राम के परिधान में सजकर उनके पदचिन्हों पर चलने की सीख के साथ उसने आगे बढ़ना शुरू किया.. संयोग भी ऐसा बना, कि विजित जब राम की वेशभूषा में तैयार हुआ, उस वक्त महाभारत सिरियल चल रहा था..

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और 16 कलाओं में निपुण भगवान कृष्ण का अवतार पृथ्वी पर इसलिए हुआ, कि लोग उनके जीवन चरित्र से सीख लेकर अपने जीवन में सफल बनाएं।

मोबाइल युग से पहले प्रदेश में रामलीला, कृष्णलीला और रहस का प्रचलन था, गांव-गांव में इनका आयोजन हुआ करता था, लोग भगवान राम, कृष्ण के जीवन चरित्र से सीख लेते और वैसा ही जीवन जीने की कोशिश करते थे.. लेकिन समय के साथ उनकी जगह टीवी सीरियल और मोबाइल एप्स ने ले लिया। अब ज़माना टिकटॉक का है।

हम सब एक-दूसरे से भगवान राम जैसा चरित्र की आशा करते हैं, लिहाजा जरूरत इस बात की है, कि हम इसकी शुरुआत खुद से करें.. भले आज के हालात में राम बनना.. राम जैसा होना कठिन सा लगता हो.. पर मर्यादाओं में बंधकर जीना आपके जीवन को सफल ज़रूर बना देगा..