Monday, September 26, 2022

20 रुपये के लिए भारतीय रेलवे के खिलाफ 22 साल तक लड़ा मुकदमा… अब कोर्ट ने सुनाया फैसला…

मथुरा के एक व्यक्ति ने 20 रुपये के लिए रेलवे के खिलाफ 23 साल पहले केस किया था जिसे उन्होंने जीत लिया है। कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया है कि वो 12 फीसदी ब्याज के साथ पूरा पैसा एक महीने के भीतर शिकायत कर्ता तुंगनाथ चतुर्वेदी को दे। जिला उपभोक्ता फोरम ने आदेश दिया कि यदि अगले 30 दिनों तक राशि का भुगतान नहीं किया जाता हैमतो ब्याज दर को संशोधित कर 15% कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने वित्तीय एवं मानसिक पीड़ा और केस में खर्च के लिए रेलवे को आदेश दिया है कि वो 15 हजार रुयये अतिरिक्त तुंगनाथ चतुर्वेदी को दें।

जानकारी के मुताबिक मामला 25 दिसंबर 1999 का है। तुंगनाथ चतुर्वेदी के मुताबिक ‘मैं उस दिन एक दोस्त के साथ मुरादाबाद का टिकट खरीदने के लिए मथुरा छावनी रेलवे स्टेशन गया था। मैंने उस व्यक्ति को टिकट खिड़की पर 100 रुपये दिए। हालाँकि, उसने मेरे बकाया 70 रुपये के बजाय 90 रुपये काट लिए और शेष राशि वापस नहीं की। मैंने क्लर्क से कहा कि उसने मुझसे अधिक शुल्क लिया लेकिन मुझे फिर भी पैसे वापस नहीं मिले।’ मैंने जनहित में ये केस लड़ा।’

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मथुरा के एक व्यक्ति ने 20 रुपये के लिए रेलवे के खिलाफ 23 साल पहले केस किया था जिसे उन्होंने जीत लिया है। कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया है कि वो 12 फीसदी ब्याज के साथ पूरा पैसा एक महीने के भीतर शिकायत कर्ता तुंगनाथ चतुर्वेदी को दे। जिला उपभोक्ता फोरम ने आदेश दिया कि यदि अगले 30 दिनों तक राशि का भुगतान नहीं किया जाता हैमतो ब्याज दर को संशोधित कर 15% कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने वित्तीय एवं मानसिक पीड़ा और केस में खर्च के लिए रेलवे को आदेश दिया है कि वो 15 हजार रुयये अतिरिक्त तुंगनाथ चतुर्वेदी को दें।

जानकारी के मुताबिक मामला 25 दिसंबर 1999 का है। तुंगनाथ चतुर्वेदी के मुताबिक ‘मैं उस दिन एक दोस्त के साथ मुरादाबाद का टिकट खरीदने के लिए मथुरा छावनी रेलवे स्टेशन गया था। मैंने उस व्यक्ति को टिकट खिड़की पर 100 रुपये दिए। हालाँकि, उसने मेरे बकाया 70 रुपये के बजाय 90 रुपये काट लिए और शेष राशि वापस नहीं की। मैंने क्लर्क से कहा कि उसने मुझसे अधिक शुल्क लिया लेकिन मुझे फिर भी पैसे वापस नहीं मिले।’ मैंने जनहित में ये केस लड़ा।’