Saturday, December 3, 2022

वायरल फीवर का फैल रहा संक्रमण, सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में बुखार के मरीजों की उमड़ी भीड़, पिछले एक सप्ताह से रोज औसतन 100 मरीज वायरल के..

सिम्स में पहुंच रहे मरीजों की भीड़। - Dainik Bhaskar

बिलासपुर – वायरल फीवर का संक्रमण फैल गया है ।इसके मरीजों की संख्या पिछले दो हफ्ते से लगातार बढ़ रही है। CIMS और शहर के सभी प्राइवेट हॉस्पिटल, क्लीनिक में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में दर्द के मरीजों की कतार है। डाक्टर कहते हैं कि सितंबर से वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय मौसम ना सर्द रहता है और ना गर्म, लिहाजा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में वायरस जल्दी अटैक कर लेता है।

शहर में पिछले 15 दिनों से बार – बार बदलते मौसम बदल रहा है। कभी बारिश हो जाती है तो कभी तेज घूप होती है। इसके कारण कुछ ही घंटे में तापमान में 10 डिग्री तक का बदलाव हो जाता है। ऐसे में भीगने, ठंडी हवा की चपेट में आने के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। इस बार वायरल के असर में बदलाव देखा जा रहा है। अब तक यह संक्रमण सर्दी , खांसी , जुकाम और बुखार होने के बाद तीन – चार दिन में ठीक हो जाता था लेकिन , पिछले एक हफ्ते में यह देखने में आ रहा है कि मरीजों को वायरल से ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है । यही वजह है कि अब सरकारी के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी वायरल फीवर के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है । 70 प्रतिशत मरीजों में वायरल फीवर है। सिम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ पंकज टेंभूर्निकर के मुताबिक वायरल के मरीजों की संख्या में पिछले दो – तीन हफ्तों में बहुत इजाफा हुआ है। पहले जहां दिनभर में 20-25 मरीज ही वायरल के आते थे। अभी 100 से अधिक मरीज रोज आ रहे हैं।

अभी भी कोरोना का इतना डर है कि बुखार के बाद लोग तुरंत जांच कराने नहीं जा रहे हैं। फीवर होने पर पहले लोग या तो घरेलू नुस्खे आजमाते हैं या फिर मेडिकल स्टोर से खुद ही दवाई लेकर अपने ही स्तर इलाज करने लगते हैं। दो – तीन दिन में जब हालत ज्यादा बिगड़ने लगती है, तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। यही परेशानी की सबसे बड़ी वजह है। डाक्टरों के मुताबिक लोगों को चाहिए कि जैसे ही वायरल संक्रमण होने की आशंका लगे सीधे डॉक्टर के पास जाकर इलाज लेना चाहिए। ऐसे में संक्रमण बढ़ने से पहले आसानी से रिकवर हो जाता है।

CIMS की डाक्टर आरती पांडे कहती हैं कि लोगों को इस बदलते मौसम में गुनगुना पानी ही पीना चाहिए और कोशिश करना चाहिए कि बाहर का खाना ना खाएं । सर्द- जुकाम की स्थिति आने पर रात में हल्दी वाल दूध पीना चाहिए। विक्स डालकर पानी का भाप लेने से भी मरीजों को आराम मिल सकता है। बीमारी बढ़ने से पहले ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

CIMS में पिछले 15 दिनों से कर्मचारी हड़ताल पर है। जिसकी वजह से अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भी भटकना अपड़ता है। वहीं अब प्रबंधन ने नाराज कर्मचारियों का प्रोविजनल पीरियड खत्म करने 9 सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है। इसकी सूचना सिम्स की डीन डॉ तृप्ति नगरिया ने पत्र लिखकर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को दी है। वहीं कर्मचारियों ने भी पत्र लिखकर जवाब देते हुए कहा है कि इस तरह की जांच टीम पहले भी गठित हो चुकी है जिसका आजतक कोई नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में जब तक उनकी वेतन वृद्धि और उन्हें रेगुलर नहीं किया जाता , वह अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।

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सिम्स में पहुंच रहे मरीजों की भीड़। - Dainik Bhaskar

बिलासपुर – वायरल फीवर का संक्रमण फैल गया है ।इसके मरीजों की संख्या पिछले दो हफ्ते से लगातार बढ़ रही है। CIMS और शहर के सभी प्राइवेट हॉस्पिटल, क्लीनिक में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में दर्द के मरीजों की कतार है। डाक्टर कहते हैं कि सितंबर से वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय मौसम ना सर्द रहता है और ना गर्म, लिहाजा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में वायरस जल्दी अटैक कर लेता है।

शहर में पिछले 15 दिनों से बार – बार बदलते मौसम बदल रहा है। कभी बारिश हो जाती है तो कभी तेज घूप होती है। इसके कारण कुछ ही घंटे में तापमान में 10 डिग्री तक का बदलाव हो जाता है। ऐसे में भीगने, ठंडी हवा की चपेट में आने के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। इस बार वायरल के असर में बदलाव देखा जा रहा है। अब तक यह संक्रमण सर्दी , खांसी , जुकाम और बुखार होने के बाद तीन – चार दिन में ठीक हो जाता था लेकिन , पिछले एक हफ्ते में यह देखने में आ रहा है कि मरीजों को वायरल से ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है । यही वजह है कि अब सरकारी के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी वायरल फीवर के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है । 70 प्रतिशत मरीजों में वायरल फीवर है। सिम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ पंकज टेंभूर्निकर के मुताबिक वायरल के मरीजों की संख्या में पिछले दो – तीन हफ्तों में बहुत इजाफा हुआ है। पहले जहां दिनभर में 20-25 मरीज ही वायरल के आते थे। अभी 100 से अधिक मरीज रोज आ रहे हैं।

अभी भी कोरोना का इतना डर है कि बुखार के बाद लोग तुरंत जांच कराने नहीं जा रहे हैं। फीवर होने पर पहले लोग या तो घरेलू नुस्खे आजमाते हैं या फिर मेडिकल स्टोर से खुद ही दवाई लेकर अपने ही स्तर इलाज करने लगते हैं। दो – तीन दिन में जब हालत ज्यादा बिगड़ने लगती है, तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। यही परेशानी की सबसे बड़ी वजह है। डाक्टरों के मुताबिक लोगों को चाहिए कि जैसे ही वायरल संक्रमण होने की आशंका लगे सीधे डॉक्टर के पास जाकर इलाज लेना चाहिए। ऐसे में संक्रमण बढ़ने से पहले आसानी से रिकवर हो जाता है।

CIMS की डाक्टर आरती पांडे कहती हैं कि लोगों को इस बदलते मौसम में गुनगुना पानी ही पीना चाहिए और कोशिश करना चाहिए कि बाहर का खाना ना खाएं । सर्द- जुकाम की स्थिति आने पर रात में हल्दी वाल दूध पीना चाहिए। विक्स डालकर पानी का भाप लेने से भी मरीजों को आराम मिल सकता है। बीमारी बढ़ने से पहले ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

CIMS में पिछले 15 दिनों से कर्मचारी हड़ताल पर है। जिसकी वजह से अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भी भटकना अपड़ता है। वहीं अब प्रबंधन ने नाराज कर्मचारियों का प्रोविजनल पीरियड खत्म करने 9 सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है। इसकी सूचना सिम्स की डीन डॉ तृप्ति नगरिया ने पत्र लिखकर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को दी है। वहीं कर्मचारियों ने भी पत्र लिखकर जवाब देते हुए कहा है कि इस तरह की जांच टीम पहले भी गठित हो चुकी है जिसका आजतक कोई नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में जब तक उनकी वेतन वृद्धि और उन्हें रेगुलर नहीं किया जाता , वह अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।