Thursday, December 8, 2022

अनोखी शादी….दुल्हा-दुल्हन न बोल सकते, न सुन सकते…साइन लैंग्वेज में मंत्रों को समझाया और हुआ विवाह।

रायपुर। रायपुर के सुंदर नगर में एक अनोखी शादी हुई। शायद पहली बार ऐसा विवाह हुआ कि दूल्हा और दुल्हन दोनों बोल-सुन नहीं सकते और दोनों के मंत्रोच्चार को साइन लैंग्वेज में ट्रांसलेट कर उन्हें बताया गया, उसका अर्थ समझाया गया। योग दिवस में शादी होने के कारण वरमाला भी वीरभद्रासन मुद्रा में हुई।

कोपलवाणी संस्था में यह शादी हुई। इसमें 23 वर्षीय मूक बधिर वधु मीनाक्षी का विवाह दुर्ग निवासी 29 वर्षीय मूकबधिर वर लक्की श्रीवास्तव के साथ कराया गया। इस विवाह के साक्षी बने लगभग 300 लोग। शादी समता कॉलोनी स्थित गायत्री मंदिर में मंत्रोच्चारण और वैदिक रीति रिवाज के साथ कराई गई।

शादी में बहुत कुछ खास रहा। शादी के सात वचनों को कोपलवाणी की फाउंडर पदमा शर्मा ने साइन लैंग्वेज में वर-वधु को समझाया। मीनाक्षी अनाथ है, वो कई सालों से नारी निकेतन में रह रही थी। मूकबधिर होने के कारण 5 साल पहले उसे मूक बधिर संस्था कोपलवाणी भेज दिया गया। यहां पदमा शर्मा के संरक्षण में मीनाक्षी ने साइन लैंग्वेज और आर्ट एंड क्राफ्ट सीखा।

एक साल पहले पदमा शर्मा दुर्ग स्थित सिद्धी विनायक मंदिर दर्शन करने पहुंचीं। जहां से उन्होंने पूजा का सामान खरीदा। जिस दुकानदार से खरीदा, वो मूक बधिर लड़का लक्की था।

लक्की को पदमा ने अपना कांटेक्ट नंबर देकर कहा कि जब भी जरूरत पड़े वो उसे वीडियो कॉल करके साइन लैंग्वेज में बात कर सकता है। कुछ महीने पहले लक्की अपने घरवालों के साथ संस्था आया और बताया कि उसे शादी करनी है।

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रायपुर। रायपुर के सुंदर नगर में एक अनोखी शादी हुई। शायद पहली बार ऐसा विवाह हुआ कि दूल्हा और दुल्हन दोनों बोल-सुन नहीं सकते और दोनों के मंत्रोच्चार को साइन लैंग्वेज में ट्रांसलेट कर उन्हें बताया गया, उसका अर्थ समझाया गया। योग दिवस में शादी होने के कारण वरमाला भी वीरभद्रासन मुद्रा में हुई।

कोपलवाणी संस्था में यह शादी हुई। इसमें 23 वर्षीय मूक बधिर वधु मीनाक्षी का विवाह दुर्ग निवासी 29 वर्षीय मूकबधिर वर लक्की श्रीवास्तव के साथ कराया गया। इस विवाह के साक्षी बने लगभग 300 लोग। शादी समता कॉलोनी स्थित गायत्री मंदिर में मंत्रोच्चारण और वैदिक रीति रिवाज के साथ कराई गई।

शादी में बहुत कुछ खास रहा। शादी के सात वचनों को कोपलवाणी की फाउंडर पदमा शर्मा ने साइन लैंग्वेज में वर-वधु को समझाया। मीनाक्षी अनाथ है, वो कई सालों से नारी निकेतन में रह रही थी। मूकबधिर होने के कारण 5 साल पहले उसे मूक बधिर संस्था कोपलवाणी भेज दिया गया। यहां पदमा शर्मा के संरक्षण में मीनाक्षी ने साइन लैंग्वेज और आर्ट एंड क्राफ्ट सीखा।

एक साल पहले पदमा शर्मा दुर्ग स्थित सिद्धी विनायक मंदिर दर्शन करने पहुंचीं। जहां से उन्होंने पूजा का सामान खरीदा। जिस दुकानदार से खरीदा, वो मूक बधिर लड़का लक्की था।

लक्की को पदमा ने अपना कांटेक्ट नंबर देकर कहा कि जब भी जरूरत पड़े वो उसे वीडियो कॉल करके साइन लैंग्वेज में बात कर सकता है। कुछ महीने पहले लक्की अपने घरवालों के साथ संस्था आया और बताया कि उसे शादी करनी है।