Thursday, October 6, 2022

वायरल…..कर्मचारी औऱ सरकार के बीच रिश्ते में कितनी मिठास…… मेंहदी लगे हाथों की वायरल तस्वीर कुछ बोलती है…

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में आपसी रिश्तों में मिठास भरने और उन्हे मज़बूती देने वाला सबसे बड़ा तीजा तिहार गुज़र गया… ठेठरी – ख़ुरमी के मीठेपन के साथ बेटी – माई के साथ परिवार के रिश्ते को फ़िर से एक नई मिठास… एक नई ऊर्जा मिल गई। प्रदेश के पुराने रिवाज के मुताबिक महिलाएं अपने मायके में यह त्यौहार मनाने पहुंची। आस्था के बीच उल्लास और उमंग के माहौल में घर-घर आयोजन हुए। लेकिन इसी दरम्यान एक महिला कर्मचारी के हाथों रची मेहंदी की तस्वीर भी खूब वायरल हुई। जिसमें लिखा था- “न मायके में न ससुराल में, तीजा उपवास हड़ताल में”….।

यह तस्वीर बयां कर रही थी कि 22 अगस्त से अपनी डीए और एचआरए की मांग को लेकर कर्मचारी बेमुद्दत हड़ताल पर हैं और इसमें शामिल महिला कर्मचारी इस बार पंडाल पर ही तीजा की रस्म पूरी कर रहीं हैं ।इस तस्वीर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की परंपरा- संस्कृति को मजबूत करने की कवायद हो रही है। वहीं दूसरी तरफ एक तब़के को पुराना रिवाज तोड़कर एक नई परंपरा की शुरुआत करनी पड़ रही है। नई परंपरा की शुरुआत तो उस दिन भी हो गई थी – जब कोई बोनस… कोई इंसेंटिव.. या कोई और अतिरिक्त सुविधा की बजाए छत्तीसगढ़ के कर्मचारी / अधिकारी डीए और एचआरए की मांग को लेकर पिछले कई महीनों से आंदोलन के रास्ते पर चल पड़े।

आपसी रिश्तों में मिठास भरने वाले इस त्यौहार के माहौल में लोग सरकार और उसके ही कर्मचारियों के रिश्ते में मिठास की बज़ाय तल्ख़ी का अहसास कर रहे हैं…।

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बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में आपसी रिश्तों में मिठास भरने और उन्हे मज़बूती देने वाला सबसे बड़ा तीजा तिहार गुज़र गया… ठेठरी – ख़ुरमी के मीठेपन के साथ बेटी – माई के साथ परिवार के रिश्ते को फ़िर से एक नई मिठास… एक नई ऊर्जा मिल गई। प्रदेश के पुराने रिवाज के मुताबिक महिलाएं अपने मायके में यह त्यौहार मनाने पहुंची। आस्था के बीच उल्लास और उमंग के माहौल में घर-घर आयोजन हुए। लेकिन इसी दरम्यान एक महिला कर्मचारी के हाथों रची मेहंदी की तस्वीर भी खूब वायरल हुई। जिसमें लिखा था- “न मायके में न ससुराल में, तीजा उपवास हड़ताल में”….।

यह तस्वीर बयां कर रही थी कि 22 अगस्त से अपनी डीए और एचआरए की मांग को लेकर कर्मचारी बेमुद्दत हड़ताल पर हैं और इसमें शामिल महिला कर्मचारी इस बार पंडाल पर ही तीजा की रस्म पूरी कर रहीं हैं ।इस तस्वीर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की परंपरा- संस्कृति को मजबूत करने की कवायद हो रही है। वहीं दूसरी तरफ एक तब़के को पुराना रिवाज तोड़कर एक नई परंपरा की शुरुआत करनी पड़ रही है। नई परंपरा की शुरुआत तो उस दिन भी हो गई थी – जब कोई बोनस… कोई इंसेंटिव.. या कोई और अतिरिक्त सुविधा की बजाए छत्तीसगढ़ के कर्मचारी / अधिकारी डीए और एचआरए की मांग को लेकर पिछले कई महीनों से आंदोलन के रास्ते पर चल पड़े।

आपसी रिश्तों में मिठास भरने वाले इस त्यौहार के माहौल में लोग सरकार और उसके ही कर्मचारियों के रिश्ते में मिठास की बज़ाय तल्ख़ी का अहसास कर रहे हैं…।