Thursday, October 6, 2022

कौन हैं, जो अच्छे अधिकारियों को नहीं पचा पाते ? तहसीलदार मोर के खिलाफ किसने फैलाई अफवाह ?

बिलासपुर– राजस्व प्रकरण में देरी,आमजनों से दूर,सालों से लटके मामले और कालोनाइजरों एवं ज़मीन के दलालों से युक्त बिलासपुर तहसील कार्यालय जहां आम आदमी अपने परिवार के लिए स्वयं से साधारण जाति ,निवास,आमदनी तक बनाने में जूते तक घिस जाते थे, फिर भी बैगेर दलालों के सहयोग से नही बन पाता था, जरूरतमंद लोगों एवं आमजनो को जानते समझते हुए भी मोटी रकम देना पड़ रहा था। तहसील कार्यालय में पिछले कई सालो से ढील ढाल रवैये की वजह से सैकड़ों प्रकरण लंबित थे, वहीं कई एक मामले लंबे समय से बेवजह लटके पड़े थे, जिनके कोई वादी, प्रतिवादी का कोई अता-पता नही था। ऐसे में बिलासपुर तहसील में रमेश कुमार मोर आये , इन्होंने 15 सितंबर 2021 को पदभार संभाला। जब इन्होंने कार्यभार ग्रहण किया तब इन्हें 3291 ई कोर्ट के मामले मिले, इन प्रकरणो में कई तरह के राजस्व मामले थे, कुछ मामले सफेदपोश रसूखदार कालोनाइजरों से संबंधित और कुछ मामले जमीन से जुड़े दलालों सहित अन्य थे, चूंकि पिछले काफी समय से तहसील कार्यालय में दलालों और कालोनाइजरों के कब्जे रहे है, और अपने सभी तरह के लीगल और ईलीगल कार्य बड़ी आसानी से कराने में इनको कभी कोई दिक्कत नहीं हो रहा था इसी बीच तहसीलदार रमेश कुमार मोर के आने से सबसे ज्यादा दिक्कत इनको ही होने लगीं , वही दूसरी तरफ जमीन से जुड़े दलालों को अपने गफलत भरे कार्यो को नही होने पर हुई, रमेश कुमार मोर तहसीलदार की दिनचर्या और तेजगति कार्यशैली और तेजतर्रार की काबलियत तब दिखने लगी, जब वर्षो से लंबित ई कोर्ट के 3291 प्रकरण जो पूर्व में थे वही इनके आने पर 1अक्टूबर2021से 30 अप्रैल 2022के मध्य इनके रहते 1940 नये प्रकरण दर्ज हुए इस प्रकार दोनों मिलाकर5231 लंबित प्रकरणों में से इन्होंने केवल 7 महीने के कार्यकाल में 4320 मामलो का निराकरण करने में सफल रहे ,वही औषतन मामलो के निराकरण कार्यलिमिट के हिसाब से प्रतिदिन लगभग दो दर्जन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, इन सब के बावजूद इनको कुछ जमीन से जुड़े भू माफियाओ ने इनकी कार्यशैली पर काफी कुछ उलजुलूल अफवाह फैलाने की कोशिश किये, इन पर कई तरह के ब्लेम लगाये गये ,इधर इनके न्यायालय में आज की वर्तमान स्थिति में केवल 911 लगभग मामले लंबित है इन्होंने अपने बिलासपुर तहसीलदार के पद पर आते ही सबसे पहले शहर में पुराने बड़े मामलों जिनमें शासकीय भूमि और विवादित जनसमस्या से संबंधित सभी नये पुराने मामलों की फ़ाइलो की परते खोल दी इसी सब के चलते अब भू माफिया और जमीन के दलालों की आंख के कंकड़ की तरह चुभने वाले तहसीलदार रमेश कुमार मोर के खिलाफत में एक वर्ग विशेष को लगा दिया गया है जो ऐन केन प्रकरणों को लेकर लोगों को दिग्भ्रमित करने वाले मामलो में संलिप्तता दिखाने में जी जान से लगे हैं । देखा जा रहा है कि शहर में पिछले काफी लंबे समय से शहर सहित शहर से लगे बेशकीमती जमीनों पर भू माफियाओं की नजर लगी हुई है इसमें यह बात भी काफी हद तक सही है, कि इसमें कहीं ना कहीं राजस्व अमले की भागीदारी है, चाहे वह संबंधित क्षेत्र के चर्चित पटवारी या राजस्व अधिकारी अब राजस्व विभाग के बड़े अफसरों और जनप्रतिनिधियों को समझना होगा।

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बिलासपुर– राजस्व प्रकरण में देरी,आमजनों से दूर,सालों से लटके मामले और कालोनाइजरों एवं ज़मीन के दलालों से युक्त बिलासपुर तहसील कार्यालय जहां आम आदमी अपने परिवार के लिए स्वयं से साधारण जाति ,निवास,आमदनी तक बनाने में जूते तक घिस जाते थे, फिर भी बैगेर दलालों के सहयोग से नही बन पाता था, जरूरतमंद लोगों एवं आमजनो को जानते समझते हुए भी मोटी रकम देना पड़ रहा था। तहसील कार्यालय में पिछले कई सालो से ढील ढाल रवैये की वजह से सैकड़ों प्रकरण लंबित थे, वहीं कई एक मामले लंबे समय से बेवजह लटके पड़े थे, जिनके कोई वादी, प्रतिवादी का कोई अता-पता नही था। ऐसे में बिलासपुर तहसील में रमेश कुमार मोर आये , इन्होंने 15 सितंबर 2021 को पदभार संभाला। जब इन्होंने कार्यभार ग्रहण किया तब इन्हें 3291 ई कोर्ट के मामले मिले, इन प्रकरणो में कई तरह के राजस्व मामले थे, कुछ मामले सफेदपोश रसूखदार कालोनाइजरों से संबंधित और कुछ मामले जमीन से जुड़े दलालों सहित अन्य थे, चूंकि पिछले काफी समय से तहसील कार्यालय में दलालों और कालोनाइजरों के कब्जे रहे है, और अपने सभी तरह के लीगल और ईलीगल कार्य बड़ी आसानी से कराने में इनको कभी कोई दिक्कत नहीं हो रहा था इसी बीच तहसीलदार रमेश कुमार मोर के आने से सबसे ज्यादा दिक्कत इनको ही होने लगीं , वही दूसरी तरफ जमीन से जुड़े दलालों को अपने गफलत भरे कार्यो को नही होने पर हुई, रमेश कुमार मोर तहसीलदार की दिनचर्या और तेजगति कार्यशैली और तेजतर्रार की काबलियत तब दिखने लगी, जब वर्षो से लंबित ई कोर्ट के 3291 प्रकरण जो पूर्व में थे वही इनके आने पर 1अक्टूबर2021से 30 अप्रैल 2022के मध्य इनके रहते 1940 नये प्रकरण दर्ज हुए इस प्रकार दोनों मिलाकर5231 लंबित प्रकरणों में से इन्होंने केवल 7 महीने के कार्यकाल में 4320 मामलो का निराकरण करने में सफल रहे ,वही औषतन मामलो के निराकरण कार्यलिमिट के हिसाब से प्रतिदिन लगभग दो दर्जन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, इन सब के बावजूद इनको कुछ जमीन से जुड़े भू माफियाओ ने इनकी कार्यशैली पर काफी कुछ उलजुलूल अफवाह फैलाने की कोशिश किये, इन पर कई तरह के ब्लेम लगाये गये ,इधर इनके न्यायालय में आज की वर्तमान स्थिति में केवल 911 लगभग मामले लंबित है इन्होंने अपने बिलासपुर तहसीलदार के पद पर आते ही सबसे पहले शहर में पुराने बड़े मामलों जिनमें शासकीय भूमि और विवादित जनसमस्या से संबंधित सभी नये पुराने मामलों की फ़ाइलो की परते खोल दी इसी सब के चलते अब भू माफिया और जमीन के दलालों की आंख के कंकड़ की तरह चुभने वाले तहसीलदार रमेश कुमार मोर के खिलाफत में एक वर्ग विशेष को लगा दिया गया है जो ऐन केन प्रकरणों को लेकर लोगों को दिग्भ्रमित करने वाले मामलो में संलिप्तता दिखाने में जी जान से लगे हैं । देखा जा रहा है कि शहर में पिछले काफी लंबे समय से शहर सहित शहर से लगे बेशकीमती जमीनों पर भू माफियाओं की नजर लगी हुई है इसमें यह बात भी काफी हद तक सही है, कि इसमें कहीं ना कहीं राजस्व अमले की भागीदारी है, चाहे वह संबंधित क्षेत्र के चर्चित पटवारी या राजस्व अधिकारी अब राजस्व विभाग के बड़े अफसरों और जनप्रतिनिधियों को समझना होगा।