तखतपुर (टेकचंद कारड़ा)- केंद सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनरो के डीए में जुलाई 2021 तक पर रोक लगा दी है, इस निर्णय का छग व्याख्याता संघ ने विरोध किया है।

संघ का कहना है, कि सरकार मितब्ययता के नाम पर केवल कर्मचारियों को निशाना बना रही है। आज देश, प्रदेश और शहर- गांव तक कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप है। प्रदेश की जनता के साथ कर्मचारियों का परिवार भी लॉक डाउन के कारण घरों में कैद हैं। वहीं विपरीत परिस्थितियों में भी प्रदेश के कर्मचारी जनता को कोरोना वायरस से बचाने की जंग में अग्रिम पंक्ति में लड़ाई लड़ रहा है, जिसमें कर्मचारी अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर कोरोनावायरस को हराने में जुटे हुए हैं, साथ ही विभिन्न विभागों के शासकीय कर्मचारी भी कोरोना से बचाव कार्यक्रम में योगदान दे रहे हैं। ऐसे विपरीत समय में देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कर्मचारी परिवार के ऊपर सबसे बड़ा आर्थिक आघात किया है। केंद्र के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लगभग 125 लाख परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। जो कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
संघ का कहना है, कि यदि सरकार को रकम जुटाना ही है तो गैर जरूरी खर्चो में कटौती करे न कि भत्ते में वैसे भी प्रदेश के कर्मचारियो को जुलाई 2019 से पाँच प्रतिशत महंगाई भत्ता अभी तक नहीं मिला है। केंद्र सरकार के पद चिन्हों पर चलते हुए राज्य सरकार महंगाई भत्ता बंद करने का निर्णय लेती है तो प्रदेश के कर्मचारियों को दो वर्ष तक महंगाई भत्ते से वंचित होना पड़ेगा जो अन्याय है, संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा एम सी रॉय जितेंद्र शुक्ला अश्विनी मिश्रा प्रशांत कोन्हेर निरंजन पांडेय सौरभ सक्सेना मोना हिराधर रेखा गुल्ला अरविंद चंदेल विश्राम निर्मलकर राजकुमार श्याम उरांव जनक राम राजेश सोनी राजेंद्र साहू शैलेश शर्मा सहित अन्य ने इस निर्णय का विरोध किया है।

By GiONews Team

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